जनता के गुस्से को शांत करने के लिए फंसाया गया’: पूर्व AAP नेता ने IB कर्मचारी हत्याकांड में सजा के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया

पूर्व AAP नेता ने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कर्मचारी की हत्या के मामले में मिली सजा को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में दावा किया गया है कि उन्हें “जनता के गुस्से को शांत करने के लिए मामले में फंसाया गया”। मामला 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान हुई IB कर्मचारी की हत्या से जुड़ा है।

Aug 27, 2026 - 00:18
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जनता के गुस्से को शांत करने के लिए फंसाया गया’: पूर्व AAP नेता ने IB कर्मचारी हत्याकांड में सजा के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया

इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कर्मचारी की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए एक पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) नेता ने अपनी सजा के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया है। याचिका में उन्होंने दावा किया है कि उन्हें मामले में “जनता के गुस्से को शांत करने” के लिए फंसाया गया था। मामला 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान हुई IB कर्मचारी की हत्या से जुड़ा है।

सजा के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे

पूर्व AAP नेता ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की है। उनका कहना है कि मामले में उन्हें गलत तरीके से आरोपी बनाया गया और उनके खिलाफ पेश किए गए साक्ष्यों को सही तरीके से नहीं देखा गया।

याचिका में कथित तौर पर यह भी कहा गया है कि उस समय माहौल बेहद तनावपूर्ण था और घटना को लेकर लोगों में भारी आक्रोश था। उनका दावा है कि इसी सार्वजनिक दबाव के बीच उन्हें जिम्मेदार ठहराया गया।

2020 दिल्ली दंगों से जुड़ा मामला

यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से संबंधित है। हिंसा के दौरान IB कर्मचारी की हत्या हुई थी। मामले की जांच के बाद कई लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाया गया और अदालत में आरोपों तथा उपलब्ध साक्ष्यों की सुनवाई हुई।

पूर्व AAP नेता ने अब हाईकोर्ट के सामने अपनी दोषसिद्धि और सजा पर पुनर्विचार की मांग की है।

याचिका में क्या दावा किया गया?

अपील में आरोपी की ओर से यह तर्क दिया गया है कि उन्हें अपराध से जोड़ने वाले साक्ष्य पर्याप्त नहीं हैं। उनका कहना है कि मामले में उनकी भूमिका को लेकर संदेह है और निचली अदालत के निष्कर्षों की दोबारा न्यायिक समीक्षा की जानी चाहिए।

अब हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों अपनी-अपनी दलीलें रखेंगे। अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और निचली अदालत के फैसले की कानूनी समीक्षा करेगी।

यह मामला दिल्ली दंगों से जुड़े महत्वपूर्ण आपराधिक मामलों में शामिल है। हाईकोर्ट में अपील की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट होगा कि निचली अदालत के फैसले में कोई कानूनी त्रुटि थी या नहीं।

फिलहाल पूर्व AAP नेता की याचिका ने एक बार फिर 2020 दिल्ली हिंसा और IB कर्मचारी हत्या मामले को चर्चा में ला दिया है।

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