अमेरिका में H-1B वीजा फीस बढ़कर $1 लाख से ज्यादा! भारतियों पर पड़ सकता है बड़ा असर

अमेरिका ने नए H-1B वीजा के लिए $103,265 फीस का प्रस्ताव रखा है। अगर नियम लागू होता है, तो भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और उन्हें नियुक्त करने वाली कंपनियों पर असर पड़ सकता है।

Aug 25, 2026 - 00:51
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अमेरिका में H-1B वीजा फीस बढ़कर $1 लाख से ज्यादा! भारतियों पर पड़ सकता है बड़ा असर

अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने नए H-1B वीजा के लिए $103,265 (करीब ₹89 लाख) की फीस तय करने का प्रस्ताव रखा है। यह कदम पहले लगाए गए $100,000 शुल्क को स्थायी नियामकीय व्यवस्था में बदलने की दिशा में उठाया गया है। हालांकि, प्रस्ताव अभी अंतिम नियम नहीं बना है और इस पर 30 दिनों तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी गई हैं।

H-1B वीजा होगा और महंगा

H-1B वीजा अमेरिका में विदेशी कुशल कर्मचारियों को काम करने की अनुमति देता है। खास तौर पर टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और अन्य विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में अमेरिकी कंपनियां इस वीजा का इस्तेमाल करती हैं।

प्रस्तावित $103,265 शुल्क मौजूदा सामान्य फीस की तुलना में बहुत बड़ा इजाफा है। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि इससे अमेरिकी श्रमिकों के हितों की रक्षा करने और विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

भारतीय प्रोफेशनल्स पर क्यों पड़ेगा असर?

भारत H-1B कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभार्थी देशों में शामिल है। इसलिए अमेरिकी वीजा नियमों में बड़े बदलाव का असर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और उन्हें नियुक्त करने वाली कंपनियों पर पड़ सकता है। कंपनियों के लिए इतनी बड़ी अतिरिक्त लागत नए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के फैसले को प्रभावित कर सकती है।

इसका मतलब यह हो सकता है कि कुछ कंपनियां अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों की भर्ती करने से पहले लागत और जरूरत का ज्यादा सावधानी से आकलन करें। इससे भारत से अमेरिका जाने की योजना बना रहे कुछ कुशल पेशेवरों के लिए नौकरी के अवसरों पर अप्रत्यक्ष असर पड़ने की आशंका है।

अभी प्रस्ताव अंतिम नहीं

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि $103,265 की नई फीस अभी लागू नहीं हुई है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने प्रस्ताव जारी किया है और इसके बाद सार्वजनिक टिप्पणियों की प्रक्रिया होगी। नियम को अंतिम रूप देने से पहले कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।

इसके अलावा, पहले लागू किए गए $100,000 शुल्क को जून 2026 में एक संघीय न्यायाधीश ने अवैध करार देते हुए रोक दिया था। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने नए प्रस्ताव के जरिए अलग कानूनी आधार पर शुल्क को लागू करने की कोशिश की है।

अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के लिए क्या?

प्रस्ताव का असर सभी H-1B मामलों पर एक जैसा नहीं होगा। मौजूदा नियमों और प्रस्ताव में कुछ स्थितियों को अलग तरीके से देखा गया है। इसलिए भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स को अंतिम नियम आने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचना चाहिए।

अगर प्रस्ताव अंतिम रूप लेता है, तो अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी कुशल कर्मचारियों को नियुक्त करना महंगा हो सकता है। इसका असर अमेरिकी टेक सेक्टर, भारतीय आईटी कंपनियों और अमेरिका में करियर बनाने की योजना रखने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।

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