भारत के भविष्य के निर्माता’: विरोध-प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रपति मुर्मू ने छात्रों की सराहना की
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छात्रों को भारत के भविष्य के निर्माता बताते हुए युवाओं की प्रतिभा, मेहनत और नवाचार की सराहना की। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर रोक और युवाओं के लिए बेहतर अवसरों की जरूरत पर जोर दिया।
नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के युवाओं और छात्रों की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने छात्रों को “भारत के भविष्य के निर्माता” बताते हुए कहा कि देश के विकास और भविष्य को आकार देने में युवाओं की अहम भूमिका है।
परीक्षा व्यवस्था में सुधार पर जोर
राष्ट्रपति मुर्मू ने छात्रों से जुड़े परीक्षा संबंधी मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परीक्षाएं छात्रों के लिए अवसरों का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। सरकार परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार कर रही है, ताकि पेपर लीक और अनुचित साधनों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
उन्होंने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध और चिंता देखने को मिल रही है।
युवाओं में बढ़ रहा उद्यमिता का रुझान
राष्ट्रपति ने युवाओं के बदलते करियर रुझान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा अब केवल नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार पैदा करने और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने भारत के बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय युवाओं की प्रतिभा और समर्पण को वैश्विक स्तर पर भी पहचान मिल रही है। कई भारतीय युवा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में महत्वपूर्ण नेतृत्व भूमिकाएं निभा रहे हैं।
विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका
राष्ट्रपति ने युवाओं को देश की प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए उनके ज्ञान, प्रतिभा और नवाचार का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करने की बात कही। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत की युवा शक्ति देश को विकास के नए मुकाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
मुर्मू का संदेश ऐसे समय में आया है जब छात्रों से जुड़े परीक्षा सुधार, पारदर्शिता और अवसरों के मुद्दे सार्वजनिक चर्चा में हैं। उनके संबोधन में युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के साथ-साथ उनके भविष्य को सुरक्षित और बेहतर बनाने के लिए सरकार, समाज और संस्थानों की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया गया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या के संबोधन में छात्रों को भारत के भविष्य का आधार बताते हुए परीक्षा सुधार, पेपर लीक पर रोक, युवाओं की उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी को प्रमुखता दी।
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