ईरान को बड़ा झटका! डॉलर सिस्टम से बाहर होंगी मनी लॉन्ड्रिंग में मदद करने वाली संस्थाएं: अमेरिकी वित्त मंत्री
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान की मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों में मदद करने वाली संस्थाओं को अमेरिकी डॉलर सिस्टम से बाहर किया जाएगा। इससे ईरान के वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी आर्थिक और वित्तीय कार्रवाई को और सख्त करने के संकेत दिए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ईरान से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं को अमेरिकी डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था से बाहर किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य ईरान की उन वित्तीय गतिविधियों पर दबाव बढ़ाना है, जिनके जरिए प्रतिबंधों से बचने या धन के प्रवाह को बनाए रखने की कोशिश की जाती है।
डॉलर सिस्टम से बाहर करने की तैयारी
स्कॉट बेसेंट के बयान के मुताबिक, अमेरिका ऐसी संस्थाओं को अपने वित्तीय नेटवर्क से अलग करने पर काम कर रहा है जो ईरान से जुड़ी अवैध वित्तीय गतिविधियों में भूमिका निभाती हैं। डॉलर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय लेन-देन में सबसे महत्वपूर्ण मुद्राओं में से एक है। ऐसे में अमेरिकी डॉलर सिस्टम से बाहर होना किसी भी संस्था के लिए बड़ा आर्थिक झटका माना जाता है।
अमेरिका लंबे समय से ईरान पर विभिन्न आर्थिक प्रतिबंध लागू करता रहा है। इन प्रतिबंधों का एक प्रमुख उद्देश्य ईरान की वित्तीय क्षमता को सीमित करना और ऐसे नेटवर्क पर रोक लगाना है, जिनके जरिए प्रतिबंधित गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराया जा सकता है।
ईरान की वित्तीय गतिविधियों पर बढ़ेगा दबाव
अमेरिकी कार्रवाई का सीधा असर उन कंपनियों और वित्तीय संस्थानों पर पड़ सकता है जो ईरान से जुड़े लेन-देन को सुविधाजनक बनाने में मदद करती हैं। डॉलर आधारित बैंकिंग प्रणाली तक पहुंच सीमित होने से अंतरराष्ट्रीय भुगतान, व्यापार और वित्तीय लेन-देन मुश्किल हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका की वित्तीय ताकत का बड़ा हिस्सा उसके बैंकिंग नेटवर्क और डॉलर की वैश्विक भूमिका से आता है। इसलिए किसी संस्था को डॉलर सिस्टम से बाहर करना केवल अमेरिकी बाजार तक सीमित कार्रवाई नहीं होती, बल्कि उसके अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर भी असर डाल सकती है।
मनी लॉन्ड्रिंग पर अमेरिका का सख्त रुख
मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए अवैध या प्रतिबंधित स्रोतों से प्राप्त धन को वैध वित्तीय व्यवस्था में शामिल करने की कोशिश की जाती है। अमेरिका इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर कड़े नियम लागू करता है।
बेसेंट का बयान बताता है कि वॉशिंगटन ईरान से जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर निगरानी और कार्रवाई को और मजबूत करना चाहता है। खासतौर पर ऐसी संस्थाओं को निशाना बनाया जा सकता है जो प्रतिबंधों से बचने के लिए वैकल्पिक वित्तीय रास्तों का इस्तेमाल करती हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव में नया मोर्चा
यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक तनाव बना हुआ है। ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रही है। ऐसे में वित्तीय नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव तेहरान के लिए चुनौती बढ़ा सकता है।
हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रभावित संस्थाएं अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में कितनी महत्वपूर्ण हैं और ईरान उनके जरिए कितनी आर्थिक गतिविधियां संचालित करता है। फिलहाल बेसेंट का बयान यह स्पष्ट करता है कि अमेरिका ईरान से जुड़े वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ अपनी नीति को और कठोर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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