केंद्रीय मंत्रियों के लुटियंस बंगले पर एक साल में ₹92 करोड़ खर्च, 12 साल में बिल ₹547 करोड़ के पार

 दिल्ली के सबसे पॉश इलाके लुटियंस दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी बंगलों की चमक-दमक पर सरकार का खर्च हर साल रिकॉर्ड तोड़ रहा है। एक RTI से खुलासा हुआ है कि सिर्फ वित्त वर्ष 2025-26 में इन बंगलों के रखरखाव पर 92.35 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

Aug 24, 2026 - 23:08
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केंद्रीय मंत्रियों के लुटियंस बंगले पर एक साल में ₹92 करोड़ खर्च, 12 साल में बिल ₹547 करोड़ के पार

इसमें बंगलों की मरम्मत, रेनोवेशन और साज-सज्जा का खर्च शामिल है।

11 साल में 3 गुना बढ़ा खर्च
RTI के आंकड़े बताते हैं कि मंत्रियों के बंगलों पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। 
2014-15 में इन आवासों पर 27.47 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जो 2025-26 में बढ़कर 92.35 करोड़ रुपये* हो गया है। यानी 11 साल में सालाना खर्च तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ गया है।

पिछले साल ही 2024-25 में यह खर्च 71.98 करोड़ था, जो एक साल में सीधे 20 करोड़ से ज्यादा बढ़ गया।

12 साल में 547 करोड़ से ज्यादा खर्च
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) इन बंगलों की देखभाल करता है। RTI के मुताबिक 2014-15 से 2025-26 तक, 12 साल में इन बंगलों पर कुल 547.68 करोड़ रुपये* खर्च हो चुके हैं।

यह आंकड़ा सिर्फ केंद्रीय मंत्रियों के बंगलों का है, इसमें सांसदों के आवास शामिल नहीं हैं।

एक मंत्री के बंगले पर औसतन 1.2 करोड़ का खर्च
अगर हिसाब लगाएं तो केंद्र में करीब 70 से 72 मंत्री होते हैं। इस लिहाज से 2025-26 में *एक मंत्री के बंगले पर औसतन 1.2 करोड़ रुपये* का खर्च आया है। हालांकि यह सिर्फ औसत है, किसी बंगले पर ज्यादा तो किसी पर कम खर्च होता है।

पुराने बंगले हैं, इसलिए खर्च ज्यादा - अधिकारी
अधिकारी इस बढ़ते खर्च के पीछे बंगलों का पुराना होना बता रहे हैं। लुटियंस दिल्ली के ज्यादातर बंगले 80 से 100 साल पुराने हैं। ये बंगले 1912 से 1930 के बीच ब्रिटिश दौर में बनाए गए थे।

पुराने होने की वजह से इनमें सीलन, दीमक, पुरानी वायरिंग, पाइपलाइन लीकेज जैसी समस्याएं आती रहती हैं। इसके अलावा पंखे, LED लाइट बदलने, टाइल्स, प्लंबिंग और स्ट्रक्चर को अपग्रेड करने पर भी हर साल करोड़ों खर्च होते हैं।

अब इस बेतहाशा बढ़ते खर्च पर सवाल भी उठने लगे हैं कि इन ऐतिहासिक बंगलों के रखरखाव की लागत को कैसे कंट्रोल किया जाए, क्योंकि महंगाई और पुरानी इमारतों के कारण आने वाले सालों में यह बिल और भी बढ़ने की आशंका है।

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