कैलाश दीपक अस्पताल के डॉ. मनीष साहनी बोले- ब्रेस्ट कैंसर को मात देने में अर्ली डिटेक्शन अहम, शुरुआती पहचान से बेहतर इलाज संभव
कैलाश दीपक अस्पताल के कंसल्टेंट सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मनीष साहनी ने ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती पहचान और समय पर इलाज को बेहतर परिणाम के लिए अहम बताया। उन्होंने नियमित स्क्रीनिंग, ब्रेस्ट सेल्फ एग्जामिनेशन और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर भी जोर दिया।
नई दिल्ली। ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसर में से एक है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस बीमारी से जंग में सबसे अहम भूमिका इसकी शुरुआती पहचान और समय पर इलाज की है। जागरूकता की कमी और स्क्रीनिंग में देरी के चलते भारत में बड़ी संख्या में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों का पता बीमारी के एडवांस स्टेज में चलता है, जिससे उपचार अधिक जटिल हो जाता है।
कैलाश दीपक अस्पताल, दिल्ली के कंसल्टेंट सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मनीष साहनी ने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में बेहतर परिणाम के लिए महिलाओं को शुरुआती लक्षणों और नियमित जांच के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि समय रहते बीमारी की पहचान होने पर उपचार शुरू किया जा सकता है और मरीज के बेहतर परिणाम की संभावना बढ़ती है।
ब्रेस्ट सेल्फ एग्जामिनेशन को लेकर जागरूकता जरूरी
डॉ. मनीष साहनी के मुताबिक महिलाओं को ब्रेस्ट सेल्फ एग्जामिनेशन के बारे में सही जानकारी देना जरूरी है। स्तन में किसी तरह की असामान्य गांठ, आकार में बदलाव, त्वचा में परिवर्तन या अन्य असामान्य लक्षण नजर आने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि उचित आयु और जोखिम के अनुसार स्क्रीनिंग मैमोग्राफी जैसी जांच ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती पहचान में मदद कर सकती है। हालांकि, स्क्रीनिंग की जरूरत और अंतराल महिला की उम्र, जोखिम और चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार डॉक्टर से सलाह लेकर तय किया जाना चाहिए।
खराब जीवनशैली से बढ़ सकता है जोखिम
विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली भी ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम से जुड़े कारकों में शामिल है। खराब खान-पान, धूम्रपान, शराब का सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी और मोटापा जैसे कारक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। यही वजह है कि कम उम्र की महिलाओं में भी ब्रेस्ट कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं।
डॉ. साहनी ने महिलाओं को पौष्टिक आहार लेने, नियमित व्यायाम करने, प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करने और स्वस्थ वजन बनाए रखने की सलाह दी। उनके मुताबिक जीवनशैली में छोटे लेकिन सकारात्मक बदलाव लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।
स्तनपान और हार्मोनल थेरेपी पर भी ध्यान जरूरी
डॉ. साहनी के मुताबिक स्तनपान समेत कुछ कारक ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम करने में भूमिका निभा सकते हैं। वहीं, हार्मोनल थेरेपी का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह और उचित जोखिम मूल्यांकन के बाद ही किया जाना चाहिए।
स्टेज-4 ब्रेस्ट कैंसर में भी आधुनिक उपचार से उम्मीद
डॉ. मनीष साहनी ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा और प्रिसीजन मेडिसिन की मदद से स्टेज-4 ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों के उपचार में भी काफी प्रगति हुई है। इससे कई मरीजों की जीवन प्रत्याशा और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर से प्रभावी तरीके से लड़ने के लिए केवल इलाज पर निर्भर रहने के बजाय जागरूकता, स्क्रीनिंग, शुरुआती पहचान और समय पर उपचार पर समान रूप से जोर देना जरूरी है।
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