चीनी संकट पर खड़गे के मोदी सरकार से 3 सवाल: 10 लाख टन आयात, 40% महंगाई और E20 नीति पर घेरा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीनी की बढ़ती कीमतों, घटते स्टॉक और 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री आयात को लेकर मोदी सरकार से 3 सवाल पूछे। E20 और एथेनॉल नीति की समीक्षा की भी मांग उठाई।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने त्योहारों से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने भारत में चीनी के स्टॉक, कीमतों में तेजी और E20 के लिए एथेनॉल उत्पादन की नीति पर तीन सीधे सवाल उठाए हैं।
10 लाख टन ड्यूटी-फ्री आयात के फैसले पर सवाल
खड़गे ने कहा कि भारत दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में शामिल होने के बावजूद ऐसी स्थिति में कैसे पहुंच गया कि सरकार को 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति देनी पड़ी। केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर काबू पाने के लिए 31 अक्टूबर 2026 तक यह आयात कोटा मंजूर किया है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि देश में चीनी का शुरुआती स्टॉक नौ साल के निचले स्तर पर पहुंचने की स्थिति क्यों बनी और पहले निर्यात पर रोक लगाने के बाद अब आयात की जरूरत क्यों पड़ी। सरकार के अनुसार, कम उत्पादन के कारण 2026-27 सीजन के लिए चीनी का स्टॉक घटने का अनुमान है।
खड़गे का दूसरा सवाल- महंगाई की जिम्मेदारी किसकी?
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि पिछले कुछ महीनों में चीनी की कीमतों में करीब 40% तक तेजी आई है और त्योहारों से पहले इसका बोझ आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। हालिया रिपोर्टों में भी घरेलू कीमतों में तेज वृद्धि और आपूर्ति पर दबाव की बात कही गई है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों में खुदरा कीमत और वृद्धि की दर अलग हो सकती है।
E20 और एथेनॉल नीति पर भी निशाना
खड़गे ने सरकार की E20 एथेनॉल नीति की समीक्षा की मांग करते हुए पूछा कि जब चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता है और आयात की जरूरत पड़ रही है, तो गन्ने और अन्य फीडस्टॉक के एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल की नीति पर पुनर्विचार क्यों नहीं किया जा रहा।
उन्होंने कहा कि पहले उत्पादन में कमी आई, फिर स्टॉक निचले स्तर पर पहुंचा और अब विदेश से चीनी आयात की अनुमति दी गई है। इसी आधार पर उन्होंने सरकार से पूछा, “ये कैसा आत्मनिर्भर भारत है?” खड़गे के इस बयान के बाद चीनी की कीमत, उत्पादन, आयात और एथेनॉल नीति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
सरकार ने क्या कदम उठाए?
बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र ने केवल आयात की अनुमति ही नहीं दी है, बल्कि जमाखोरी रोकने के लिए बड़े उपभोक्ताओं के चीनी स्टॉक पर भी सीमा तय की है। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य घरेलू आपूर्ति बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रित करना है।
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