UGC के जातीय भेदभाव नियमों पर फिर विचार करेगा केंद्र, सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि UGC के 2026 के जाति-भेदभाव विरोधी इक्विटी नियमों पर पुनर्विचार किया जा रहा है।

Aug 20, 2026 - 20:58
 0
UGC के जातीय भेदभाव नियमों पर फिर विचार करेगा केंद्र, सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी

नई दिल्ली: उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव से निपटने के लिए बनाए गए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2026 के इक्विटी रेगुलेशंस को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। केंद्र ने गुरुवार को अदालत को बताया कि इन नियमों पर दोबारा विचार किया जा रहा है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं लंबित हैं।

जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक

UGC ने जनवरी 2026 में Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 अधिसूचित किए थे। इनका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव को रोकना और छात्रों के लिए सुरक्षित एवं समान शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करना था।

हालांकि, 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों को फिलहाल रोक दिया था। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना था कि कुछ प्रावधान अस्पष्ट हैं और उनके दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

केंद्र ने मांगा चार सप्ताह का समय

गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सुनवाई हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार UGC के नियमों पर पुनर्विचार कर रही है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने UGC को व्यापक जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया।

अदालत ने फिलहाल मामले के विभिन्न कानूनी पहलुओं पर विस्तृत बहस नहीं की और सुनवाई को आगे के लिए टाल दिया।

नियमों को लेकर क्यों उठा विवाद?

2026 के नियमों में उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव-विरोधी व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया गया था। लेकिन कुछ याचिकाकर्ताओं ने नियमों के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा सभी वर्गों को समान रूप से संरक्षण नहीं देती।

विशेष रूप से नियमों की धारा 3(1)(c) को लेकर आपत्ति जताई गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा को अधिक स्पष्ट और सभी समुदायों के लिए समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।

मामला अब किस दिशा में जाएगा?

यह मामला मूल रूप से 2019 में दायर एक याचिका से जुड़ा है, जिसमें उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव से निपटने के लिए प्रभावी व्यवस्था की मांग की गई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत UGC ने नए नियम तैयार किए।

अब केंद्र के पुनर्विचार के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नियमों में क्या बदलाव किए जाते हैं और उन्हें किस रूप में लागू किया जाता है। इस पूरे मामले का असर देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भेदभाव से निपटने की भविष्य की व्यवस्था पर पड़ सकता है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0