नेपाल की तबाही के बीच बदला काठमांडू का रुख, विदेशी रेस्क्यू टीमों को मिली मंजूरी; भारत ने संभाला मोर्चा

नेपाल में बाढ़ की भयावह स्थिति के बीच काठमांडू ने विदेशी रेस्क्यू मदद स्वीकार कर ली है। भारत ने नेपाल के अनुरोध पर टनल रेस्क्यू, मेडिकल टीम और राहत सामग्री भेजने की तैयारी तेज कर दी है।

Aug 29, 2026 - 00:04
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नेपाल की तबाही के बीच बदला काठमांडू का रुख, विदेशी रेस्क्यू टीमों को मिली मंजूरी; भारत ने संभाला मोर्चा

नेपाल में भारी बाढ़ और भूस्खलन से बिगड़े हालात के बीच काठमांडू ने आखिरकार विदेशी खोज और बचाव टीमों की मदद लेने पर सहमति जता दी है। लापता लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित इलाकों में राहत अभियान तेज करने के लिए नेपाल ने अब अंतरराष्ट्रीय सहयोग का रास्ता खोल दिया है। भारत ने नेपाल के अनुरोध पर तुरंत कार्रवाई शुरू करते हुए रेस्क्यू और मेडिकल सहायता बढ़ाने की तैयारी की है।

दबाव के बाद नेपाल ने बदला फैसला

बाढ़ के बाद नेपाल सरकार ने शुरुआत में विदेशी बचाव दलों की मदद लेने को लेकर ज्यादा उत्साह नहीं दिखाया था। लेकिन कई इलाकों में फंसे लोगों और लापता विदेशी नागरिकों की जानकारी सामने आने के बाद स्थिति गंभीर होती गई। सीमित स्थानीय संसाधनों के कारण राहत और बचाव अभियान में मुश्किलें बढ़ीं, जिसके बाद काठमांडू ने विदेशी विशेषज्ञों की मदद स्वीकार करने का फैसला किया।

भारत ने भेजी विशेष रेस्क्यू टीम

नेपाल की ओर से अनुरोध मिलने के बाद भारत ने टनल रेस्क्यू विशेषज्ञों की टीम भेजने की तैयारी की है। एक रिकॉनिसेंस टीम पहले प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेगी और सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए जरूरी उपकरणों और तकनीक की जरूरत का आकलन करेगी।

भारत की ओर से मेडिकल सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों की टीम के साथ जरूरी दवाइयां और राहत सामग्री भेजी गई है। प्रभावित इलाकों में संपर्क और आवाजाही बहाल करने के लिए भारत ने बेली ब्रिज उपलब्ध कराने की पेशकश भी की है।

राहत सामग्री की तीसरी खेप रवाना

भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री की तीसरी खेप भी भेजी है। इसमें पोर्टेबल जनरेटर, भोजन, पानी शुद्ध करने वाली गोलियां और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं। भारत की ओर से पहले भी टेंट, कंबल, दवाइयां, सोलर लैंप, पंप और अन्य आपातकालीन सामग्री भेजी जा चुकी है।

बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में सुरंगों और दुर्गम इलाकों में बचाव अभियान बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में विदेशी विशेषज्ञों और भारत की तकनीकी सहायता से राहत कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।

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