भारत में चीनी का उत्पादन जरूरत से ज्यादा, फिर आयात क्यों? गडकरी ने बताई वजह

 भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादकों में से एक है। हर साल देश में बड़ी मात्रा में गन्ने की पैदावार होती है, जिससे जरूरत से ज्यादा चीनी बनती है। इसके बावजूद कई बार भारत को चीनी का आयात क्यों करना पड़ता है? यह सवाल केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले साल सितंबर 2025 में चीनी उद्योग के एक कार्यक्रम में उठाया था।

Aug 24, 2026 - 22:22
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भारत में चीनी का उत्पादन जरूरत से ज्यादा, फिर आयात क्यों? गडकरी ने बताई वजह

जरूरत से ज्यादा उत्पादन बना चुनौती
गडकरी ने कहा था कि देश में चीनी का उत्पादन घरेलू खपत से अधिक हो रहा है। अतिरिक्त उत्पादन से चीनी मिलों के सामने भंडारण, बाजार और कीमत से जुड़ी दिक्कतें खड़ी हो जाती हैं।

अगर उत्पादन लगातार बढ़ता रहा और मांग उसी अनुपात में नहीं बढ़ी, तो इसका सीधा असर चीनी के दाम और गन्ना किसानों की आय पर पड़ सकता है। उन्होंने सलाह दी कि चीनी मिलें सिर्फ चीनी बनाने पर निर्भर रहने के बजाय गन्ने से दूसरे उत्पाद बनाने पर ध्यान दें।

एथेनॉल और बायोफ्यूल पर जोर
नितिन गडकरी लंबे समय से चीनी उद्योग को एथेनॉल उत्पादन की ओर बढ़ने के लिए कह रहे हैं। 

उनका कहना है कि गन्ने से बनने वाला एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाया जा सकता है। इससे दो फायदे होंगे - एक तरफ चीनी उद्योग को अतिरिक्त गन्ने का इस्तेमाल करने का विकल्प मिलेगा, दूसरी तरफ पेट्रोलियम आयात पर भारत की निर्भरता कम होगी।

उन्होंने चीनी मिलों से एथेनॉल के अलावा बायोफ्यूल, ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर भी काम करने की अपील की थी। उनके मुताबिक गन्ने को सिर्फ चीनी तक सीमित रखने के बजाय उससे कई तरह के उत्पाद बनाए जा सकते हैं।

तो फिर भारत को आयात की जरूरत क्यों?
भारत में किसी एक सीजन में उत्पादन ज्यादा होना यह तय नहीं करता कि पूरे साल स्टॉक पर्याप्त रहेगा। चीनी का उत्पादन कई चीजों पर निर्भर करता है - मौसम, गन्ने की पैदावार, घरेलू खपत, सरकारी नीतियां, निर्यात और बफर स्टॉक।

कई बार घरेलू बाजार में कीमतों को काबू में रखने और पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के लिए सरकार को आयात की अनुमति देनी पड़ती है। वहीं, जब उत्पादन अधिक होता है तो सरकार अतिरिक्त चीनी को निर्यात या एथेनॉल उत्पादन के जरिए बाजार से हटाने की कोशिश करती है।

गडकरी का मुख्य संदेश यही था कि अतिरिक्त उत्पादन को समस्या के बजाय अवसर के तौर पर देखा जाए। अगर इसे एथेनॉल और बायोफ्यूल जैसे उत्पादों में बदला गया तो इससे न सिर्फ चीनी उद्योग को स्थिरता मिलेगी, बल्कि गन्ना किसानों के लिए भी बेहतर बाजार तैयार होगा।

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