“बिल्डिंग गिर जाएगी क्या?” छात्र के सवाल ने खोली पीजी की पोल, दिल्ली में छात्रों की सुरक्षा पर बहस

 दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक छात्र की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें लिखा है “बिल्डिंग गिर जाएगी क्या?”। सत्य निकेतन में इमारत गिरने के बाद इस सवाल ने हजारों छात्रों के मन की चिंता को सामने ला दिया है। छात्र डिग्री के लिए घर से दूर आते हैं, लेकिन रहने की जगह ही सुरक्षित नहीं है।

Sep 7, 2026 - 18:00
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 “बिल्डिंग गिर जाएगी क्या?” छात्र के सवाल ने खोली पीजी की पोल, दिल्ली में छात्रों की सुरक्षा पर बहस

डिग्री के साथ सुरक्षा भी चाहिए
दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ना हर छात्र का सपना होता है। छात्र अपने घर से दूर आकर यहां पढ़ाई करते हैं और भविष्य के सपने देखते हैं। लेकिन इस सपने के साथ एक बड़ी चिंता भी जुड़ी है - रहने की जगह। वायरल तस्वीर में एक छात्र अपनी डिग्री लिए खड़ा है और उसके साथ लिखा है “बिल्डिंग गिर जाएगी क्या?”। यह सवाल मजाक नहीं, बल्कि हकीकत है। छात्र ने बताया कि वह जिस पीजी में रहता है, उसकी हालत इतनी खराब है कि रात में डर लगता है।

पीजी छात्रों की मजबूरी बन गया है
दिल्ली में कॉलेज के हॉस्टल में सभी छात्रों को जगह नहीं मिलती। इसलिए 90% छात्र प्राइवेट पीजी या किराए के कमरों में रहते हैं। सत्य निकेतन, विजय नगर जैसे इलाकों में एक छोटे से कमरे का किराया 10 से 15 हजार रुपये है। कम बजट में छात्रों को ऐसी इमारतों में रहना पड़ता है जो 20-25 साल पुरानी हैं और कभी उनकी मरम्मत नहीं हुई। मकान मालिक ज्यादा पैसे कमाने के लिए अवैध तरीके से एक मंजिल के ऊपर दूसरी मंजिल बना देते हैं, जिससे इमारत कमजोर हो जाती है।

एक सवाल जो सिस्टम से पूछा गया है
“बिल्डिंग गिर जाएगी क्या?” यह सवाल सिर्फ एक छात्र का नहीं, बल्कि हजारों छात्रों का है। छात्र पूछ रहे हैं कि जब हम इतना किराया देते हैं तो हमें सुरक्षित छत क्यों नहीं मिलती। क्या मकान मालिक की कोई जिम्मेदारी नहीं है? क्या सरकार कभी इन पीजी की जांच करती है। सत्य निकेतन हादसे के बाद कई छात्रों ने अपनी इमारतों की तस्वीरें शेयर की हैं, जिनमें बड़ी-बड़ी दरारें दिख रही हैं।

सुरक्षित आवास देना भी जरूरी है
शिक्षा का मतलब सिर्फ अच्छी कॉलेज और डिग्री देना नहीं है, बल्कि छात्रों को सुरक्षित माहौल देना भी है। प्रशासन को चाहिए कि वह सभी पीजी और हॉस्टलों का हर साल सेफ्टी ऑडिट करे। मकान मालिकों के लिए सख्त नियम बनाए जाएं और जो नियमों का पालन न करे, उसका लाइसेंस रद्द किया जाए। छात्रों के लिए भी जरूरी है कि वे कोई भी पीजी लेने से पहले उसकी अच्छे से जांच करें और अगर कोई खतरा दिखे तो तुरंत शिकायत करें। क्योंकि जान है तो डिग्री है।

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