बेटे को खोने के बाद टूटे परिवार ने लिया सबसे बड़ा फैसला, कॉर्निया दान कर दी दूसरों को रोशनी

दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी इमारत गिरने से अपने जवान बेटे को खोने वाले परिवार ने गहरे सदमे में भी इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल पेश की है। परिवार ने अपने बेटे की आंखों का कॉर्निया दान करने का फैसला किया, ताकि उनकी आंखों से किसी और अंधेरी जिंदगी में उजाला आ सके।

Sep 8, 2026 - 17:05
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बेटे को खोने के बाद टूटे परिवार ने लिया सबसे बड़ा फैसला, कॉर्निया दान कर दी दूसरों को रोशनी

हादसे ने छीन लिया घर का चिराग

रविवार दोपहर सत्य निकेतन में जब 4 मंजिला पीजी इमारत गिरी तो उसमें कई छात्र दब गए। उनमें से एक था 21 साल का सौरभ, जो बिहार से दिल्ली इंजीनियरिंग की तैयारी करने आया था। सौरभ मलबे में बुरी तरह घायल हो गया और अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जिस बेटे को माता-पिता ने बड़े सपनों के साथ दिल्ली भेजा था, उसकी मौत की खबर सुनकर परिवार पर पहाड़ टूट गया। मां का रो-रोकर बुरा हाल था और पिता बेसुध होकर अस्पताल के बाहर बैठे थे।

दुख के बीच लिया रोशनी देने का फैसला

अस्पताल में ही जब डॉक्टरों ने परिवार से अंगदान के बारे में बात की तो पहले तो परिवार कुछ समझ नहीं पाया। लेकिन फिर पिता ने हिम्मत करके कहा कि उनका बेटा तो चला गया, लेकिन उसकी आंखों से किसी और को दुनिया देखने को मिल सकती है। परिवार ने तुरंत कॉर्निया दान के लिए हामी भर दी। डॉक्टरों की टीम ने कुछ ही घंटों में सौरभ का कॉर्निया निकाल लिया। परिवार ने कहा कि उनका बेटा भले ही इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी आंखें किसी और के चेहरे पर दुनिया देखती रहेंगी, यही उनके लिए सबसे बड़ा सुकून है।

अंगदान को लेकर बड़ी सीख दे गया परिवार

भारत में आज भी अंगदान को लेकर बहुत सी भ्रांतियां हैं। लोग दुख में ऐसा फैसला नहीं ले पाते। लेकिन सौरभ के परिवार ने यह दिखा दिया कि सबसे बड़े दुख में भी कैसे दूसरों के लिए सोचा जा सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक एक कॉर्निया दान से दो लोगों को आंखों की रोशनी मिल सकती है। सौरभ का यह दान दो लोगों की जिंदगी बदल देगा। AIIMS के डॉक्टरों ने भी परिवार के इस फैसले की खूब तारीफ की है और कहा है कि इससे समाज में जागरूकता बढ़ेगी।

दुख को उम्मीद में बदलने की कोशिश

सौरभ के पिता ने कहा कि बेटे की कमी तो कोई पूरी नहीं कर सकता, लेकिन अगर उसकी वजह से किसी को रोशनी मिलती है तो उन्हें लगेगा कि उनका बेटा अभी भी कहीं जिंदा है। यह कहानी सिर्फ एक हादसे की नहीं, बल्कि एक पिता के बड़े दिल की है, जिसने अपने सबसे बड़े गम को किसी और की उम्मीद में बदल दिया। सत्य निकेतन हादसे की कई दर्दनाक कहानियां हैं, लेकिन यह कहानी इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल बन गई है।

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