सत्य निकेतन हादसे के बाद मसीहा बने छात्र, NSS के स्वयंसेवकों ने बांटा पानी और खाना
दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने के बाद जहां NDRF और दमकल की टीमें मलबा हटा रही थीं, वहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों ने भी इंसानियत की मिसाल पेश की। एनएसएस के स्वयंसेवक पानी, बिस्किट और खाने के पैकेट लेकर मौके पर पहुंचे और पीड़ित छात्रों व बचावकर्मियों की मदद की।
हादसे के बाद अफरा-तफरी में आगे आए छात्र
रविवार दोपहर जब सत्य निकेतन में 4 मंजिला पीजी इमारत गिरी तो पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई। संकरी गलियों में एंबुलेंस तक को आने में दिक्कत हो रही थी। इसी बीच मोतीलाल नेहरू कॉलेज और रामलाल आनंद कॉलेज के एनएसएस के करीब 20 छात्र-छात्राएं तुरंत मौके पर पहुंच गए। उन्होंने देखा कि मलबे से निकाले गए छात्र घबराए हुए हैं और बचावकर्मी लगातार 2 घंटे से बिना पानी के काम कर रहे हैं। छात्रों ने बिना समय गंवाए पास की दुकानों से पानी की बोतलें और बिस्किट के पैकेट खरीदे और बांटने शुरू कर दिए।
पानी और स्नैक्स लेकर पहुंचे स्वयंसेवक
तस्वीरों में देखा जा सकता है कि एनएसएस की टी-शर्ट पहने छात्र हाथों में पानी की बोतलें और खाने के पैकेट लेकर खड़े हैं। एक छात्रा घायल छात्र को पानी पिला रही है, तो दूसरा छात्र पुलिसकर्मी को बिस्किट दे रहा है। स्वयंसेवकों ने बताया कि उन्होंने करीब 200 पानी की बोतलें, 150 बिस्कुट के पैकेट और केले बांटे। उनका मकसद था कि कोई भी घायल छात्र या उसके परिजन भूखा-प्यासा न रहे। यह छोटी सी मदद उस समय बहुत बड़ी साबित हुई, जब पूरा इलाका परेशान था।
बचावकर्मियों के लिए भी बने सहारा
आमतौर पर राहत अभियान में पुलिस और NDRF ही नजर आते हैं, लेकिन इस बार छात्रों ने भी मोर्चा संभाला। बचावकर्मी सुबह से बिना रुके मलबा हटा रहे थे। धूल और गर्मी के कारण उनकी हालत खराब हो रही थी। छात्रों द्वारा दिया गया पानी और ग्लूकोज बिस्किट उनके लिए राहत बन गया। एक दमकलकर्मी ने कहा कि ऐसी मदद से काम करने की हिम्मत और बढ़ जाती है। छात्रों ने मलबा हटाने में भी हल्के सामान को हटाने में मदद की।
सोशल मीडिया पर हो रही है तारीफ
छात्रों की इस पहल की तस्वीरें सामने आते ही सोशल मीडिया पर उनकी खूब तारीफ हो रही है। लोग लिख रहे हैं कि यही है असली युवा शक्ति। दिल्ली यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ने भी एनएसएस टीम की सराहना की है। सत्य निकेतन हादसे ने जहां एक तरफ लापरवाही की कहानी दिखाई, वहीं दूसरी तरफ इन छात्रों ने यह दिखा दिया कि मुश्किल समय में मदद के लिए बड़ी व्यवस्था नहीं, बल्कि बड़ा दिल चाहिए। उनकी यह पहल बाकी छात्रों के लिए भी एक प्रेरणा बन गई है।
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