राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर PM मोदी की अपील, ‘लोकल कपड़े पहनें और GRWM ट्रेंड फॉलो करें’
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से स्थानीय कपड़े पहनने और ‘Get Ready With Me’ यानी GRWM ट्रेंड के जरिए भारतीय हथकरघा को बढ़ावा देने की अपील की।
PM मोदी ने युवाओं से की खास अपील
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से भारतीय हथकरघा और स्थानीय कपड़ों को बढ़ावा देने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की हथकरघा परंपरा बेहद समृद्ध और विविध है। इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए आधुनिक सोशल मीडिया ट्रेंड का इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों, खासकर युवाओं से ‘Get Ready With Me’ यानी GRWM ट्रेंड को फॉलो करने की अपील की। उन्होंने लोगों से भारतीय हथकरघा से बने कपड़े पहनकर अपनी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करने को कहा।
स्थानीय कपड़ों को सोशल मीडिया से मिलेगा बढ़ावा
GRWM यानी ‘Get Ready With Me’ सोशल मीडिया पर लोकप्रिय ट्रेंड है, जिसमें लोग तैयार होने की प्रक्रिया का वीडियो या फोटो साझा करते हैं। प्रधानमंत्री की अपील का उद्देश्य इसी लोकप्रिय ट्रेंड के जरिए भारतीय हथकरघा को नई पहचान दिलाना है।
PM मोदी ने लोगों से कहा कि वे स्थानीय कपड़े पहनकर इस ट्रेंड में हिस्सा लें और अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करें। इससे देश के अलग-अलग हिस्सों में तैयार होने वाले पारंपरिक कपड़ों और हथकरघा उत्पादों के बारे में लोगों को जानकारी मिल सकती है।
हथकरघा क्षेत्र भारत की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों की अपनी विशिष्ट बुनाई, डिजाइन और कपड़ों की परंपराएं हैं।
हथकरघा कारीगरों को मिलेगा फायदा
प्रधानमंत्री की अपील को स्थानीय कारीगरों और बुनकरों को बढ़ावा देने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। स्थानीय हथकरघा उत्पादों की मांग बढ़ने से इससे जुड़े कारीगरों और छोटे कारोबारियों को फायदा मिल सकता है।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस हर साल 7 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिन भारत के हथकरघा क्षेत्र और उससे जुड़े बुनकरों के योगदान को सम्मान देने के लिए समर्पित है।
सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच पारंपरिक भारतीय कपड़ों को नए अंदाज में पेश करने से युवा पीढ़ी को भी हथकरघा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। GRWM जैसे ट्रेंड के जरिए भारतीय परंपरा और आधुनिक डिजिटल संस्कृति को जोड़ने का संदेश दिया गया है।
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