घर से लौटकर 3 घंटे पहले ही पीजी पहुंचा था छात्र, फिर गिरी इमारत, मलबे में दबा सारा सामान

दिल्ली के सत्य निकेतन में गिरी पीजी इमारत से एक और दर्दनाक कहानी सामने आई है। एक छात्र अपने घर से छुट्टी बिताकर महज 3 घंटे पहले ही पीजी में लौटा था, तभी इमारत गिर गई। हादसे में उसकी जान तो बच गई लेकिन उसका सारा सामान और जरूरी कागजात मलबे में दब गए, जिससे परिवार सदमे में है।

Sep 7, 2026 - 17:58
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घर से लौटकर 3 घंटे पहले ही पीजी पहुंचा था छात्र, फिर गिरी इमारत, मलबे में दबा सारा सामान

घर से लौटा था, सोचा था पढ़ाई करेगा
यह कहानी है 20 साल के आयुष की, जो दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक कॉलेज में सेकंड ईयर का छात्र है। आयुष दो दिन पहले ही अपने घर हरियाणा गया था। रविवार सुबह वह वापस दिल्ली आया ताकि सोमवार को कॉलेज जा सके। वह करीब 10 बजे सत्य निकेतन वाले अपने पीजी में पहुंचा। उसने अपना बैग रखा, कपड़े बदले और थोड़ी देर आराम करने लगा। उसे क्या पता था कि जिस कमरे में वह आराम कर रहा है, वह कुछ ही घंटों में मलबा बन जाएगा। दोपहर करीब 1:30 बजे अचानक इमारत में कंपन हुआ और वह किसी तरह भागकर बाहर निकल गया।

अचानक ढही 4 मंजिला इमारत
आयुष ने बताया कि इमारत पहले से ही काफी पुरानी थी। सीढ़ियों पर सीलन थी और दीवारों पर बड़ी-बड़ी दरारें थीं। मकान मालिक ने बस कमरों में पुट्टी लगाकर उन्हें नए दिखा दिए थे। रविवार को लगातार बारिश होने से इमारत और कमजोर हो गई थी। दोपहर में एक तेज आवाज के साथ पूरी इमारत भरभराकर गिर गई। आयुष के साथ रहने वाले 3 अन्य छात्र भी मलबे में फंस गए थे, जिन्हें बाद में बचाव दल ने निकाला।

परिवार का रो-रोकर बुरा हाल
हादसे की खबर मिलते ही आयुष के परिवार वाले हरियाणा से दिल्ली भागे आए। अस्पताल और घटनास्थल पर परिजनों का बुरा हाल था। आयुष की मां ने बताया कि उन्होंने बेटे को सुबह ही हंसते हुए विदा किया था और दोपहर में ऐसी खबर आई कि उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। परिवार के लिए यह सोचना भी मुश्किल है कि जिस बच्चे को उन्होंने पढ़ाई के लिए दूसरे शहर भेजा है, वह वहां कितना असुरक्षित है।

पीजी की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
यह हादसा सिर्फ एक इमारत गिरने का नहीं है, बल्कि दिल्ली में हजारों छात्रों की सुरक्षा का सवाल है। सत्य निकेतन, विजय नगर और मुखर्जी नगर जैसे इलाकों में हजारों पीजी चल रहे हैं, जहां बिना किसी सुरक्षा जांच के छात्रों को रखा जाता है। कई जगहों पर एक कमरे में 3-4 छात्रों को ठूंसकर रखा जाता है। इस हादसे के बाद प्रशासन ने सभी पीजी की जांच की बात कही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या हर हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा।

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