सत्य निकेतन हादसे में बड़ा एक्शन, पीजी मालिक हरिराम गुप्ता भिवाड़ी से गिरफ्तार, पड़ोसी बोला - सीधा आदमी है
दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी इमारत गिरने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पीजी के मालिक हरिराम गुप्ता को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया गया है। हादसे के बाद से वह फरार था। वहीं उसके पड़ोसी ने उसे एक साधारण और शांत स्वभाव का व्यक्ति बताया है।
भीवाड़ी से दबोचा गया आरोपी मालिक
सत्य निकेतन में रविवार को हुई इमारत हादसे के बाद से ही पीजी मालिक हरिराम गुप्ता फरार था। दिल्ली पुलिस ने उसके खिलाफ लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया था। पुलिस की तीन टीमें उसे ढूंढ रही थीं। सोमवार देर रात पुलिस को सूचना मिली कि वह राजस्थान के भिवाड़ी में अपने एक रिश्तेदार के घर छिपा हुआ है। पुलिस ने तुरंत छापा मारकर उसे गिरफ्तार कर लिया और दिल्ली लाया गया। पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है कि इमारत में अवैध निर्माण कब कराया गया था और उसकी मरम्मत क्यों नहीं कराई गई।
हादसे के बाद उठे कई गंभीर सवाल
इस हादसे ने दिल्ली में चल रहे हजारों पीजी की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर दिया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि हरिराम गुप्ता ने यह इमारत 15 साल पहले बनाई थी और बाद में बिना नक्शा पास कराए दो मंजिल और जोड़ दी थीं। नीचे की मंजिल पर दुकानें थीं और ऊपर के 3 फ्लोर पर 18 छात्र रहते थे। इमारत में कोई इमरजेंसी एग्जिट नहीं था और सीढ़ियां भी बेहद संकरी थीं। MCD की ओर से भी इमारत को पहले नोटिस दिया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब पुलिस MCD अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
पड़ोसी ने कहा - ऐसा करेगा, सोचा नहीं था
हरिराम गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद मीडिया जब उसके भिवाड़ी वाले घर पर पहुंची तो उसके पड़ोसी ने चौंकाने वाली बात कही। पड़ोसी ने कहा कि हरिराम एक बहुत ही साधारण और शांत व्यक्ति है। वह किसी से ज्यादा बात नहीं करता था और हर महीने दिल्ली किराया लेने जाता था। उसने कहा कि हमें यकीन नहीं हो रहा कि उसकी इमारत से ऐसा हादसा होगा। हालांकि पुलिस का कहना है कि किसी का स्वभाव कैसा भी हो, लेकिन कानून के हिसाब से लापरवाही की जिम्मेदारी तय होगी। अगर इमारत अवैध थी तो मालिक की जिम्मेदारी बनती है।
पीजी सुरक्षा पर फिर से बहस तेज
इस गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर दिल्ली में छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा गरमा गया है। सत्य निकेतन, मुखर्जी नगर, विजय नगर में हजारों पीजी ऐसे ही चल रहे हैं। छात्र 12 हजार रुपये देकर भी असुरक्षित इमारतों में रहने को मजबूर हैं। अब मांग उठ रही है कि सरकार सभी पीजी के लिए सेफ्टी सर्टिफिकेट अनिवार्य करे और हर साल ऑडिट हो। दिल्ली सरकार ने भी इस हादसे के बाद सभी जिलों को पीजी की जांच के आदेश दिए हैं। उम्मीद है कि इस हादसे के बाद व्यवस्था में कुछ सुधार होगा।
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