लाल मिट्टी और सदियों पुरानी कारीगरी बनी पहचान, झारखंड के मांदर को मिला GI टैग; CM हेमंत ने जताई खुशी

Sep 29, 2026 - 16:19
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लाल मिट्टी और सदियों पुरानी कारीगरी बनी पहचान, झारखंड के मांदर को मिला GI टैग; CM हेमंत ने जताई खुशी

झारखंड की लोकसंस्कृति और आदिवासी जीवन से जुड़े मांदर को अब आधिकारिक पहचान मिल गई है। भारत सरकार की GI रजिस्ट्री, चेन्नई ने ‘Mandar Of Jharkhand’ को GI के रूप में रजिस्टर किया है। GI रजिस्ट्री के रिकॉर्ड में इसका आवेदन नंबर 777 है और इसका क्षेत्र झारखंड रखा गया है। बता दें कि मांदर के लिए आवेदन 24 सितंबर 2021 को किया गया था।

मांदर को मिली पारंपरिक पहचान

GI Tag मिलने के बाद मांदर की पारंपरिक पहचान और इसे बनाने की पुरानी कला को भी मान्यता मिल गई है। मांदर झारखंड के लोकनृत्य, गीत-संगीत और लोगों के सामुदायिक जीवन का काफी अहम हिस्सा रहा है। GI आवेदन में मांदर की खास बनावट, स्थानीय सामान, इसे बनाने का पारंपरिक तरीका, इसकी अलग आवाज और झारखंड की संस्कृति से इसके जुड़ाव को आधार बनाया गया था।

स्थानीय सामान से बनता है मांदर

मांदर की खासियत सिर्फ इसकी आवाज में नहीं है, बल्कि इसे बनाने के तरीके में भी है। इसे बनाने में स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है और इसकी कारीगरी पीढ़ियों से चली आ रही है। झारखंड के कई आदिवासी समुदायों के नाच-गाने और सामाजिक कार्यक्रमों में मांदर का खास महत्व है।

GI रजिस्ट्री के मुताबिक, मांदर के लिए आवेदन Raidih Mandar Producer Company Limited, गुमला की ओर से किया गया था। ऐसे में GI Tag मिलने से गुमला के पारंपरिक मांदर बनाने वाले कारीगरों को भी पहचान मिलेगी।

अब झारखंड के नाम से जुड़ी मांदर की पहचान

GI Tag किसी ऐसे सामान या उत्पाद को मिलता है, जिसकी खास पहचान किसी खास जगह से जुड़ी होती है। मांदर के मामले में GI रिकॉर्ड में इसका क्षेत्र झारखंड दर्ज है। यानी अब झारखंड की संस्कृति से जुड़े इस पारंपरिक वाद्ययंत्र की पहचान आधिकारिक तौर पर झारखंड के नाम से जुड़ गई है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जताई खुशी

मांदर को GI Tag मिलने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी खुशी जताई है। उनके X हैंडल पर शेयर किए गए पोस्ट में कहा गया है कि झारखंड की कई पारंपरिक धरोहरों को लगातार पहचान मिल रही है। सोहराय-खोवर चित्रकला, केसरिया कलाकंद, कुचाई सिल्क, भगैया साड़ी और डोकरा क्राफ्ट के बाद अब मांदर को भी GI Tag मिला है।

पोस्ट में यह भी कहा गया है कि मांदर की बनावट और इसकी आवाज आदिवासी संस्कृति की धड़कन है।

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