मेटा के स्मार्ट ग्लास में छिपे कैमरे से बढ़ी टेंशन, लोग बोले - प्राइवेसी का क्या होगा
मेटा के नए स्मार्ट ग्लास ने टेक्नोलॉजी की दुनिया में धूम मचा दी है, लेकिन इसके साथ ही प्राइवेसी को लेकर बड़ी चिंता भी खड़ी हो गई है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें लोग मेटा के स्मार्ट ग्लास के कैमरे को टेप से बंद करते दिख रहे हैं। लोगों को डर है कि कहीं उनकी बिना इजाजत रिकॉर्डिंग न हो जाए।
चश्मे में छिपा है कैमरा, बिना फोन के होगी रिकॉर्डिंग
मेटा ने Ray-Ban के साथ मिलकर जो स्मार्ट ग्लास बनाया है, उसमें दोनों तरफ छोटे-छोटे कैमरे लगे हैं। इस चश्मे को पहनकर आप बिना फोन निकाले फोटो खींच सकते हैं, वीडियो बना सकते हैं और लाइव स्ट्रीम कर सकते हैं। दिखने में यह एक आम चश्मा लगता है, इसलिए सामने वाले को पता भी नहीं चलता कि उसकी रिकॉर्डिंग हो रही है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है और यही सबसे बड़ा खतरा भी बन गया है।
पब्लिक में बिना इजाजत रिकॉर्डिंग का डर
वायरल वीडियो में एक व्यक्ति मेट्रो में बैठा है और उसके सामने वाला व्यक्ति स्मार्ट ग्लास पहने हुए है। वीडियो बनाने वाले ने लिखा है कि उसे पता ही नहीं था कि उसकी वीडियो बन रही है। यही डर अब लोगों में फैल रहा है। अगर कोई व्यक्ति जिम में, ट्रायल रूम में या किसी प्राइवेट बातचीत के दौरान यह चश्मा पहन ले तो दूसरों की प्राइवेसी खतरे में पड़ सकती है। खासकर महिलाओं ने इसको लेकर ज्यादा चिंता जताई है और कहा है कि इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है।
यूजर्स खुद ही ढूंढ रहे हैं कैमरा बंद करने का जुगाड़
इस चिंता के कारण कई यूजर्स ने खुद ही इसका हल निकालना शुरू कर दिया है। वायरल वीडियो में कुछ लोग चश्मे के कैमरे पर काला टेप लगा रहे हैं, तो कुछ लोग सेटिंग्स में जाकर कैमरे को बंद करने का तरीका बता रहे हैं। कुछ लोगों ने तो चश्मे पर एक छोटी सी LED लाइट लगाने की मांग की है, जो रिकॉर्डिंग के समय जले ताकि सामने वाले को पता चल सके। मेटा ने कहा है कि रिकॉर्डिंग के समय चश्मे में एक छोटी लाइट जलती है, लेकिन वह इतनी छोटी है कि दिन में दिखाई नहीं देती।
तकनीक के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोई भी तकनीक बुरी नहीं होती, उसका इस्तेमाल कैसा होता है यह जरूरी है। मेटा के स्मार्ट ग्लास का इस्तेमाल करते समय कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। किसी की भी फोटो या वीडियो बनाने से पहले उसकी इजाजत लेनी चाहिए। स्कूल, अस्पताल, जिम और ट्रायल रूम जैसी जगहों पर इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। साथ ही सरकार को भी इसके लिए सख्त प्राइवेसी नियम बनाने चाहिए। तभी यह तकनीक लोगों के लिए वरदान बनेगी, नहीं तो यह अभिशाप बन सकती है।
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