UN ने बदला दुनिया का नक्शा: अफ्रीका बड़ा, यूरोप-US छोटे; अमेरिका ने क्यों किया विरोध?

UN महासभा ने Equal Earth Projection के समर्थन में प्रस्ताव पारित किया। अफ्रीका अब ज्यादा वास्तविक आकार में दिखेगा, जबकि यूरोप और अमेरिका छोटे नजर आएंगे। जानिए भारत पर असर।

Sep 5, 2026 - 15:26
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UN ने बदला दुनिया का नक्शा: अफ्रीका बड़ा, यूरोप-US छोटे; अमेरिका ने क्यों किया विरोध?

UN ने बदला दुनिया का नक्शा: अफ्रीका बड़ा, यूरोप-US छोटे; अमेरिका ने किया विरोध, जानिए भारत पर इसका क्या असर

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दुनिया के नक्शे को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव का समर्थन किया है। 4 सितंबर 2026 को हुए मतदान में 164 देशों ने Equal Earth map projection के पक्ष में वोट किया, जबकि अमेरिका इसका विरोध करने वाला एकमात्र देश रहा। छह देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। नए प्रोजेक्शन में अफ्रीका अपने वास्तविक क्षेत्रफल के अधिक करीब दिखाई देता है, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका पहले की तुलना में छोटे नजर आते हैं।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि संयुक्त राष्ट्र ने पृथ्वी का भौगोलिक नक्शा बदल दिया है या देशों की सीमाएं बदल गई हैं। बदलाव मुख्य रूप से Map Projection का है—यानी गोल पृथ्वी को सपाट कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए।

आखिर पुराने नक्शे में क्या गड़बड़ी थी?

स्कूलों और दुनिया भर में लंबे समय से इस्तेमाल होने वाला Mercator Projection वर्ष 1569 में समुद्री नेविगेशन के लिए विकसित किया गया था। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इससे दिशा और कोणों को नेविगेशन के लिए उपयोगी तरीके से दिखाना आसान था।

लेकिन इसकी एक बड़ी कमी भी है। भूमध्य रेखा से दूर स्थित क्षेत्रों का आकार नक्शे पर वास्तविक क्षेत्रफल से काफी बड़ा दिखाई देने लगता है। इसका असर यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ग्रीनलैंड जैसे क्षेत्रों पर ज्यादा पड़ता है, जबकि अफ्रीका जैसे भूमध्यरेखीय क्षेत्र तुलनात्मक रूप से छोटे नजर आते हैं।

मिसाल के तौर पर, Mercator नक्शे में ग्रीनलैंड कई बार अफ्रीका के लगभग बराबर दिखाई देता है, जबकि वास्तविक क्षेत्रफल में अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है।

Equal Earth Projection क्या है?

नए प्रस्ताव में Equal Earth Projection को बढ़ावा दिया गया है। इसे 2018 में कार्टोग्राफरों Tom Patterson, Bojan Šavrič और Bernhard Jenny ने विकसित किया था।

इस प्रोजेक्शन का उद्देश्य अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल का अनुपात ज्यादा सही तरीके से दिखाना है। इसका परिणाम यह होता है कि अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और अन्य भूमध्यरेखीय क्षेत्र पहले की तुलना में अधिक वास्तविक आकार में दिखाई देते हैं, जबकि ध्रुवों के पास के क्षेत्र अपेक्षाकृत छोटे नजर आते हैं।

हालांकि कोई भी सपाट विश्व नक्शा पृथ्वी के गोल आकार को बिना किसी विकृति के नहीं दिखा सकता। अलग-अलग projections में आकार, दूरी, दिशा और आकृति के बीच अलग-अलग समझौते करने पड़ते हैं।

अमेरिका ने क्यों किया विरोध?

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष ने इसे एक “ideological agenda” से जुड़ा मुद्दा बताया और कहा कि इससे दुनिया की वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटक सकता है।

वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि नक्शे केवल भौगोलिक जानकारी देने वाले उपकरण नहीं हैं। वे लोगों की दुनिया को देखने की धारणा को भी प्रभावित करते हैं। अफ्रीकी देशों और African Union का लंबे समय से तर्क रहा है कि Mercator projection अफ्रीका को उसके वास्तविक आकार की तुलना में छोटा दिखाता है और इससे महाद्वीप की वैश्विक छवि प्रभावित हुई है।

भारत पर क्या असर पड़ेगा?

भारत के लिए इस बदलाव का भौगोलिक या राजनीतिक असर नहीं पड़ेगा। भारत का क्षेत्रफल, सीमाएं या दुनिया में उसकी वास्तविक स्थिति बिल्कुल नहीं बदलती।

लेकिन Equal Earth जैसे projection में भारत भी अपने वास्तविक क्षेत्रफल के अनुपात में अधिक संतुलित दिखाई देगा। भारत ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।

इसका सबसे बड़ा असर शिक्षा, स्कूल की किताबों, डिजिटल मैप्स और दुनिया को देखने की वैश्विक धारणा पर पड़ सकता है। प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, इसलिए Google Maps या दूसरे सभी डिजिटल मैप तुरंत बदल जाएंगे, ऐसा नहीं है।

क्या Google Maps और नेविगेशन भी बदल जाएंगे?

जरूरी नहीं। Mercator projection की कुछ तकनीकी खूबियां अभी भी महत्वपूर्ण हैं, खासकर समुद्री और हवाई नेविगेशन में। UN समर्थित प्रस्ताव भी नेविगेशन के लिए Mercator के इस्तेमाल को खत्म करने की मांग नहीं करता।

यानी यह बदलाव मुख्य रूप से विश्व मानचित्रों, शिक्षा और सामान्य भौगोलिक प्रस्तुति से जुड़ा है, न कि GPS या दुनिया की वास्तविक सीमाओं से।

दुनिया के नक्शे की लड़ाई सिर्फ नक्शे की नहीं

Equal Earth को समर्थन मिलने के पीछे अफ्रीकी देशों की एक लंबी मुहिम भी है। समर्थकों का मानना है कि दुनिया को दिखाने के तरीके में ऐतिहासिक असंतुलन को ठीक करना जरूरी है।

UN का प्रस्ताव इसी बहस को नई दिशा देता है। 164 देशों का समर्थन इसे व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन देता है, लेकिन क्योंकि यह प्रस्ताव बाध्यकारी नहीं है, इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने देश, स्कूल, संस्थान और टेक्नोलॉजी कंपनियां भविष्य में नए projection को अपनाती हैं।

निष्कर्ष

दुनिया बदली नहीं है, दुनिया को दिखाने का तरीका बदलने की कोशिश हुई है। Equal Earth Projection अफ्रीका और दूसरे महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा वास्तविक अनुपात में दिखाता है। UN का यह कदम नक्शों की तकनीकी बहस के साथ-साथ इस सवाल को भी सामने लाता है कि हमारी किताबों और स्क्रीन पर दिखाई जाने वाली दुनिया हमारी वैश्विक सोच को कितना प्रभावित करती है।

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