झारखंड में बिजली संकट का खतरा! JBVNL पर TVNL का ₹8,000 करोड़ बकाया, CCL ने कोयला आपूर्ति को लेकर दी चेतावनी
रांची: झारखंड में बिजली उत्पादन और वितरण से जुड़ी सरकारी कंपनियों के बीच बकाये का मामला गंभीर होता जा रहा है। राज्य की बिजली उत्पादक कंपनी तेनुघाट विद्युत निगम लिमिटेड (TVNL) का झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) पर करीब 8,000 करोड़ रुपये बकाया बताया जा रहा है। वहीं, TVNL पर सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) का कोयले के मद में लगभग 3,000 करोड़ रुपये बकाया है। भुगतान में देरी के कारण कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने और बिजली उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
₹50 करोड़ के भुगतान के बाद दोबारा शुरू हुआ उत्पादन
कोयले की कमी के कारण TVNL की दूसरी उत्पादन इकाई 25 सितंबर से बंद थी। हाल ही में CCL को 50 करोड़ रुपये का आंशिक भुगतान किए जाने के बाद कोयले की आपूर्ति में सुधार हुआ। इसके बाद शुक्रवार को दूसरी यूनिट से फिर बिजली उत्पादन शुरू कर दिया गया।हालांकि, एक इकाई में उत्पादन बहाल होने के बावजूद बकाये की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। सरकारी कंपनियों के बीच भुगतान का दबाव बना हुआ है, जिससे आने वाले दिनों में कोयले की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है।
CCL की चेतावनी, भुगतान नहीं हुआ तो प्रभावित हो सकती है आपूर्ति
CCL ने TVNL प्रबंधन से बकाये का जल्द भुगतान करने को कहा है। भुगतान में और देरी होने पर भविष्य में कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। कोयले की उपलब्धता में कमी आने पर बिजली उत्पादन जारी रखना मुश्किल हो सकता है।इस पूरे मामले में TVNL की परेशानी यह है कि JBVNL से बिजली की बिक्री के एवज में भुगतान समय पर नहीं मिल पा रहा है। इससे TVNL के लिए CCL को कोयले की कीमत चुकाना चुनौती बन गया है। यानी एक सरकारी कंपनी से भुगतान में देरी का असर दूसरी कंपनी के भुगतान और बिजली उत्पादन पर पड़ रहा है।
वर्ष 2000 से बढ़ता रहा बकाया
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, JBVNL पर TVNL का बकाया वर्ष 2000 से लगातार बढ़ता हुआ करीब 8,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, TVNL पर CCL की लगभग 3,000 करोड़ रुपये की देनदारी है।
इन आंकड़ों के बीच सबसे अहम सवाल यह है कि बकाये के भुगतान की व्यवस्था कब तक सुधरेगी और बिजली उत्पादन के लिए कोयले की नियमित आपूर्ति कैसे सुनिश्चित की जाएगी।
TVNL के MD ने क्या कहा?
TVNL के प्रबंध निदेशक अनिल शर्मा के मुताबिक, कंपनी का प्रयास रहता है कि CCL को समय पर भुगतान किया जाए। उन्होंने बताया कि JBVNL से राशि मिलते ही उसे CCL को हस्तांतरित कर दिया जाता है।
अनिल शर्मा ने स्वीकार किया कि JBVNL पर TVNL का बड़ा बकाया है। उनका कहना है कि दोनों कंपनियां राज्य सरकार के उपक्रम हैं और JBVNL से भुगतान प्राप्त होते ही CCL की बकाया राशि चुकाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोयले का स्टॉक समाप्त होने की स्थिति में ही उत्पादन इकाई बंद करने की नौबत आती है।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
दूसरी यूनिट में बिजली उत्पादन दोबारा शुरू होने से फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन बकाये का बड़ा आंकड़ा अब भी चिंता का विषय है। यदि भुगतान में देरी जारी रहती है, तो कोयले की आपूर्ति और बिजली उत्पादन पर फिर दबाव पड़ सकता है।
झारखंड के लिए अब चुनौती सिर्फ बंद यूनिट को चालू रखने की नहीं, बल्कि सरकारी बिजली कंपनियों के बीच भुगतान व्यवस्था को पटरी पर लाने की भी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बकाये के निपटारे और कोयले की नियमित आपूर्ति के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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