JSSC शिक्षक नियुक्ति पर फिर बड़ा मोड़, मेरिट लिस्ट पर कमेटी ने उठाए सवाल
रांची: झारखंड में हाई स्कूल शिक्षक नियुक्ति से जुड़े मामले में एक बार फिर नया मोड़ सामने आया है। एक सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने JSSC की ओर से पेश की गई संशोधित राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप नहीं माना है। कमेटी ने आयोग को आदेश दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रखते हुए नई संशोधित राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट तैयार कर प्रस्तुत की जाए।
रविवार को हाई कोर्ट के पुराने भवन में सेवानिवृत्त जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की अध्यक्षता वाली फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने मामले की सुनवाई की। इस दौरान कमेटी ने JSSC की ओर से प्रस्तुत मेरिट लिस्ट का परीक्षण किया और उसमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप आवश्यक सुधार नहीं पाए।इसके बाद आयोग को निर्देश दिया गया कि वह सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के मुताबिक दोबारा संशोधित राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट तैयार करे।
6 अक्टूबर को अगली सुनवाई
सुनवाई के दौरान कुछ प्रार्थियों की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों और दस्तावेजों की भी जांच की गई। वहीं, अभ्यर्थियों की ओर से यह शिकायत रखी गई कि JSSC द्वारा तैयार की गई संशोधित राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट उन्हें अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है।प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार, तान्या सिंह समेत अन्य ने कमेटी के समक्ष अपना पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
हाई कोर्ट के आदेश पर चल रही जांच
यह पूरा मामला हाई स्कूल शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा है। हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मीना कुमारी समेत अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में उठे सवालों की जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित करने का निर्देश दिया था।इस कमेटी की अध्यक्षता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस गौतम कुमार चौधरी कर रहे हैं। उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया में सामने आई गड़बड़ियों और मेरिट से जुड़े विवादों की जांच कर रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है।निर्धारित समय में जांच पूरी नहीं होने के बाद हाई कोर्ट ने कमेटी को अतिरिक्त समय भी दिया है।
2016 में शुरू हुई थी शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया
JSSC ने वर्ष 2016 में स्नातक प्रशिक्षित हाई स्कूल शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी। इसके तहत कुल 17,786 पदों पर नियुक्ति होनी थी।
बताया गया है कि इनमें करीब 10 हजार पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं, जबकि बाकी पद अब भी खाली हैं।
विवाद की मुख्य वजह नियुक्ति में इस्तेमाल की गई जिलावार और राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट को लेकर है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि एक ही नियुक्ति प्रक्रिया में मेरिट तय करने के अलग-अलग आधार होने से कई योग्य उम्मीदवार चयन से बाहर रह गए।अब फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की ओर से संशोधित मेरिट लिस्ट पर फिर सवाल उठने के बाद JSSC को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप नई सूची तैयार करनी होगी।
अब नजर 6 अक्टूबर की सुनवाई पर
मेरिट लिस्ट में दोबारा बदलाव के निर्देश के बाद शिक्षक अभ्यर्थियों की नजर अब अगली सुनवाई पर है।
क्या नई मेरिट लिस्ट से पुराने विवाद का समाधान होगा?
क्या वंचित अभ्यर्थियों को नियुक्ति का रास्ता मिलेगा?
और 17,786 पदों की इस लंबी नियुक्ति प्रक्रिया का अंतिम समाधान कब निकलेगा?
इन सवालों के जवाब अब 6 अक्टूबर की सुनवाई के बाद और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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