कूड़ा नियम तोड़ा तो कट सकती है बिजली-पानी की सप्लाई, सुप्रीम कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश

 देश में कूड़े और नदियों में बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने अब बेहद सख्त रुख अपना लिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि कचरा संभालना सिर्फ नगर निगम या सफाई कर्मचारियों का काम नहीं है, कचरा पैदा करने वाले हर व्यक्ति और संस्था की भी बराबर की जिम्मेदारी है।

Aug 24, 2026 - 23:16
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कूड़ा नियम तोड़ा तो कट सकती है बिजली-पानी की सप्लाई, सुप्रीम कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश

इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करने वालों यानी बल्क वेस्ट जनरेटर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

नियम नहीं माना तो कटेगी बिजली-पानी की सप्लाई
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी जिला कलेक्टर अपने-अपने जिलों में बल्क वेस्ट जनरेटर की पहचान करें। इसके बाद लोकल निकाय उन्हें नोटिस देकर Solid Waste Management Rules, 2026 के नियमों की जानकारी देंगे।

अगर कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो जिला कलेक्टर की स्पेशल सेल के आदेश पर उसकी बिजली और पानी की सप्लाई अस्थायी तौर पर काटी जा सकती है। हालांकि, नियमों का पालन करने और अनुपालन प्रमाण-पत्र जमा करने के बाद सप्लाई फिर से जोड़ दी जाएगी।

कोर्ट ने साफ किया कि इसका मकसद सजा देना नहीं, बल्कि लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझाना है।

किन पर लागू होगा ये नियम?
ये नियम खास तौर पर उन पर लागू होगा जो बड़े पैमाने पर कूड़ा पैदा करते हैं। इसमें शामिल हैं -
- बड़े आवासीय सोसाइटी और अपार्टमेंट
- होटल, मॉल, रेस्टोरेंट और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान
- स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और निजी संस्थान

इन सभी को अपना गीला-सूखा कचरा अलग करना, उसे सही तरीके से रखना और अधिकृत एजेंसी को सौंपना अनिवार्य होगा।

‘कचरा पैदा करना अधिकार, संभालना दूसरे की जिम्मेदारी’ - कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आम सोच पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि देश में एक सोच बन गई है कि "कचरा पैदा करना मेरा अधिकार है और उसे संभालना नगर निगम की जिम्मेदारी।" 

कोर्ट ने कहा कि हर घर, हर व्यक्ति कचरा पैदा करता है, इसलिए सिर्फ सफाई कर्मचारियों के भरोसे इस बड़ी समस्या का हल नहीं निकल सकता।

अब स्कूलों में भी पढ़ाया जाएगा कचरा प्रबंधन
कोर्ट ने इस समस्या के परमानेंट हल के लिए शिक्षा विभाग को भी जिम्मेदारी दी है। स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों को कचरा प्रबंधन की थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों की जानकारी दी जाएगी। कोर्ट का मानना है कि बच्चे ही अपने परिवार में कचरे को अलग करने के लिए जागरूक कर सकते हैं।

नदियों में कचरा फेंकने पर भी पैनी नजर
सुप्रीम कोर्ट ने ठोस कचरे से नदियों में होने वाले प्रदूषण पर भी चिंता जताई है। कोर्ट ने निगरानी समिति को निर्देश दिया है कि नदियों में नगर निकायों द्वारा फेंके जा रहे ठोस कचरे से होने वाले प्रदूषण का डेटा इकट्ठा कर कोर्ट के सामने रखा जाए।

यह फैसला देश में साफ-सफाई और नागरिक जिम्मेदारी को लेकर एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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