सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सार्वजनिक मौजूदगी के बिना निजी जगह पर जातिसूचक गाली SC/ST एक्ट के तहत अपराध नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजी स्थान पर, बिना सार्वजनिक मौजूदगी के, जातिसूचक अपमान का आरोप SC/ST Act की संबंधित धारा के तहत स्वतः अपराध नहीं बनता। अदालत ने “public view” की कानूनी शर्त पर जोर दिया और कहा कि विशेष कानून लागू करने के लिए उसके सभी आवश्यक तत्वों का पूरा होना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी व्यक्ति को निजी स्थान पर, जहां कोई सार्वजनिक मौजूदगी नहीं है, जातिसूचक अपशब्द कहना हर स्थिति में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि SC/ST Act की संबंधित धाराओं को लागू करने के लिए कानून में निर्धारित आवश्यक शर्तों का पूरा होना जरूरी है। इस मामले में अदालत ने इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि कथित घटना किसी सार्वजनिक स्थान या ऐसी जगह पर नहीं हुई थी जहां आम लोग मौजूद हों।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप अपने आप SC/ST Act के तहत अपराध स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। कानून की संबंधित धारा में यह महत्वपूर्ण है कि अपमान या धमकी ऐसी परिस्थितियों में हुई हो जहां वह किसी ऐसे स्थान पर हो जिसे “public view” यानी सार्वजनिक नजर के दायरे में माना जा सके। अदालत ने निजी स्थान और सार्वजनिक स्थान के बीच अंतर को भी महत्वपूर्ण माना।
‘Public View’ की शर्त पर जोर
अदालत ने अपने फैसले में इस बात को रेखांकित किया कि SC/ST Act का उद्देश्य अनुसूचित जाति और जनजाति के सदस्यों को जाति आधारित अत्याचार और अपमान से सुरक्षा प्रदान करना है। हालांकि, किसी मामले में विशेष धाराएं लगाने से पहले उनके कानूनी तत्वों का पूरा होना आवश्यक है। यदि कथित घटना पूरी तरह निजी स्थान पर हुई और वहां कोई बाहरी व्यक्ति मौजूद नहीं था, तो “public view” से जुड़ी शर्त पर अदालत को विचार करना होगा।
हर जातिसूचक टिप्पणी पर एक जैसी धारा नहीं
इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि निजी जगह पर जाति आधारित अपमान को कानूनन स्वीकार्य माना गया है। परिस्थितियों के आधार पर अन्य कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य रूप से यह स्पष्ट किया कि SC/ST Act की विशेष धारा के तहत अपराध तय करते समय उसके प्रत्येक आवश्यक तत्व को साबित करना होगा।
फैसले का व्यापक महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला SC/ST Act के तहत मामलों में “public view” की कानूनी व्याख्या को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। अदालतों में ऐसे मामलों में घटना की जगह, वहां मौजूद लोगों और कथित टिप्पणी की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जा सकता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि किसी शिकायत में केवल आरोप होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि संबंधित कानून की आवश्यक शर्तों का पूरा होना भी जरूरी है।
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