चीनी ₹70 किलो तक पहुंची, खड़गे ने पूछा- ये कैसा आत्मनिर्भर भारत? सरकार बोली- एथेनॉल से नहीं बढ़े दाम
चीनी की कीमतों में तेजी पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार को घेरा। खड़गे ने E20 और एथेनॉल नीति पर सवाल उठाए, जबकि सरकार ने कहा कि चीनी की महंगाई के लिए एथेनॉल नहीं, बल्कि उत्पादन में कमी, मौसम, बढ़ती मांग और जमाखोरी जिम्मेदार हैं।
नई दिल्ली: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीनी की कीमत करीब ₹70 प्रति किलो पहुंचने का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल किए। उन्होंने इसे “कैसा आत्मनिर्भर भारत” बताया और महंगाई से आम लोगों पर बढ़ते बोझ की बात कही।
खड़गे ने सरकार से पूछे 3 सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीनी की बढ़ती कीमतों और घटते स्टॉक को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत जैसे बड़े चीनी उत्पादक देश में स्टॉक निचले स्तर पर क्यों पहुंचा और त्योहारों से पहले कीमतों में इतनी तेजी के लिए कौन जिम्मेदार है। खड़गे ने E20 एथेनॉल नीति की समीक्षा की जरूरत पर भी सवाल उठाया।
सरकार ने एथेनॉल को जिम्मेदार मानने से किया इनकार
केंद्र सरकार का कहना है कि चीनी की कीमतों में हालिया तेजी को एथेनॉल उत्पादन से जोड़ना सही नहीं है। सरकार के अनुसार, एथेनॉल के लिए डायवर्ट होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 के करीब 12% से घटकर 2025-26 में लगभग 9% रह गया है और देश में बनने वाले एथेनॉल का करीब तीन-चौथाई अब अनाज, खासकर मक्का जैसे स्रोतों से आता है।
सरकार ने कीमत बढ़ने के पीछे घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान, त्योहारों के कारण बढ़ती मांग, वैश्विक सप्लाई दबाव और जमाखोरी-सट्टेबाजी जैसे कारण बताए हैं। सरकार का कहना है कि घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध है और बाजार पर नजर रखी जा रही है।
कीमतों पर कितना असर पड़ा?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, औसत खुदरा चीनी कीमत 20 जुलाई को ₹48.18 प्रति किलो से बढ़कर 20 अगस्त तक ₹55.70 प्रति किलो हो गई। वहीं, कुछ स्थानीय बाजारों में खुदरा कीमत ₹70 प्रति किलो तक पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। इसीलिए “3 महीने में 40% महंगी” और “₹70 किलो” का आंकड़ा हर शहर की औसत कीमत नहीं, बल्कि अलग-अलग बाजारों और उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है।
जमाखोरी रोकने के लिए सरकार का कदम
कीमतों में तेजी के बीच केंद्र सरकार ने चीनी डीलरों पर 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक स्टॉक होल्डिंग लिमिट लागू करने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य जमाखोरी और सट्टेबाजी को रोकना तथा उपभोक्ताओं के लिए कीमतों को स्थिर रखना है।
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