USCIRF Demands Action Against RSS: संघ नेताओं को सम्मान न देने की मांग, 29 अगस्त को न्यूयॉर्क जाएंगे मोहन भागवत

अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग USCIRF ने RSS से जुड़े लोगों पर लक्षित प्रतिबंध लगाने और संघ नेताओं को हाई-लेवल मीटिंग व राजनयिक सम्मान न देने की मांग की है। RSS प्रमुख मोहन भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क जाएंगे।

Aug 20, 2026 - 18:43
Aug 20, 2026 - 18:44
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USCIRF Demands Action Against RSS: संघ नेताओं को सम्मान न देने की मांग, 29 अगस्त को न्यूयॉर्क जाएंगे मोहन भागवत

नई दिल्ली: अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग से जुड़ी एक रिपोर्ट और सिफारिशों को लेकर RSS पर कार्रवाई की मांग का मामला सामने आया है। रिपोर्ट में अमेरिका आने वाले संघ से जुड़े नेताओं को आधिकारिक सम्मान न देने जैसी सिफारिशों का भी जिक्र किया गया है।

USCIRF ने क्या कहा?

अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग USCIRF के चेयरमैन आसिफ महमूद ने RSS को लेकर गंभीर आरोप लगाए और अमेरिकी सरकार से संगठन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आयोग के सदस्य जीन मिल्स ने कहा कि अमेरिका को RSS नेताओं को हाई-लेवल मीटिंग्स या डिप्लोमैटिक कर्टसी नहीं देनी चाहिए। इसके बजाय, धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले व्यक्तियों पर लक्षित प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देने की बात कही गई।

पहले भी की गई थी कार्रवाई की सिफारिश

USCIRF की 2026 वार्षिक रिपोर्ट में भी भारत को धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे पर Country of Particular Concern घोषित करने की सिफारिश की गई थी। रिपोर्ट में RSS समेत कुछ संस्थाओं या व्यक्तियों पर संपत्ति फ्रीज करने और अमेरिका में प्रवेश पर रोक जैसे लक्षित प्रतिबंधों की सिफारिश की गई थी। हालांकि USCIRF एक सलाहकार आयोग है और उसकी सिफारिशें अपने आप अमेरिकी सरकार की नीति नहीं बन जातीं।

29 अगस्त को न्यूयॉर्क जाएंगे मोहन भागवत

यह बयान RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे से पहले आया है। वह 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में 'Universal Oneness Celebrations' कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं। कार्यक्रम का आयोजन American Hindus for Engagement and Dialogue (AHEAD) कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, उनका दौरा अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन तक फैला हो सकता है।

भारत ने पहले खारिज किए थे USCIRF के आरोप

भारत सरकार ने USCIRF की पिछली रिपोर्टों और सिफारिशों को खारिज करते हुए उन्हें चुनिंदा और विकृत आकलन बताया था। इस मुद्दे पर भारत और USCIRF के बीच धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर लंबे समय से मतभेद रहे हैं।

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