Subhash Chandra ₹22,000 Crore Debt Cut: NCLT में मतभेद से अटका मामला, जानिए आगे क्या होगा

सुभाष चंद्रा के करीब ₹22,000 करोड़ के कर्ज में कटौती से जुड़े मामले में NCLT सदस्यों के बीच मतभेद सामने आया है। मामला फिर NCLT President के पास भेजा गया है।

Aug 31, 2026 - 23:43
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Subhash Chandra ₹22,000 Crore Debt Cut: NCLT में मतभेद से अटका मामला, जानिए आगे क्या होगा

Subhash Chandra के ₹22,000 करोड़ कर्ज में कटौती पर ट्रिब्यूनल की अड़चन, NCLT में मतभेद से मामला फिर अटका

नई दिल्ली: कारोबारी सुभाष चंद्रा से जुड़े करीब ₹22,000 करोड़ के कर्ज में बड़ी कटौती के प्रस्ताव को ट्रिब्यूनल स्तर पर एक अहम कानूनी अड़चन का सामना करना पड़ रहा है। मामले में न्यायिक सदस्यों के बीच मतभेद (difference of opinion) सामने आने के बाद इसे एक बार फिर NCLT के अध्यक्ष के पास भेजा गया है।

अब NCLT अध्यक्ष के सामने दो विकल्प हैं—वे मामले पर निर्णय देने के लिए तीसरे सदस्य की नियुक्ति कर सकते हैं या स्वयं ऐसा आदेश जारी कर सकते हैं जिससे बहुमत की राय तैयार हो सके।

₹22,000 करोड़ के कर्ज का मामला क्या है?

मामला सुभाष चंद्रा से जुड़े insolvency proceedings और उनके ऊपर मौजूद बड़े कर्ज के दावों से संबंधित है। कर्जदाताओं की ओर से हजारों करोड़ रुपये के दावे किए गए हैं और इन दावों में कटौती तथा recovery को लेकर कानूनी प्रक्रिया चल रही है।

ऐसे मामलों में किसी insolvency resolution या व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े फैसले का असर creditors की संभावित recovery पर पड़ सकता है।

NCLT में क्यों आया मतभेद?

मामले की सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल के सदस्यों की राय एक जैसी नहीं रही। जब किसी बेंच के सदस्यों के बीच महत्वपूर्ण मुद्दे पर सहमति नहीं बनती है, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत मामले को आगे की राय के लिए भेजा जा सकता है।

इसी प्रक्रिया के तहत मामला दोबारा NCLT President के पास पहुंचा है।

तीसरा सदस्य क्या करेगा?

यदि अध्यक्ष तीसरे सदस्य को नियुक्त करते हैं, तो तीसरा सदस्य विवादित मुद्दों पर अपनी राय देगा। इसके बाद बहुमत की राय के आधार पर मामले पर आगे का फैसला किया जा सकता है।

दूसरा विकल्प यह है कि अध्यक्ष स्वयं आवश्यक आदेश जारी करें ताकि मामले में बहुमत का दृष्टिकोण निर्धारित हो सके।

Creditors की recovery पर पड़ेगा असर

इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि आखिर creditors को कितनी राशि वापस मिल पाएगी। हजारों करोड़ रुपये के दावों और वास्तविक recovery के बीच बड़ा अंतर होने की स्थिति में ट्रिब्यूनल का फैसला महत्वपूर्ण हो सकता है।

जब तक NCLT स्तर पर मतभेद का समाधान नहीं होता, तब तक कर्ज में प्रस्तावित कटौती और उससे जुड़ी recovery प्रक्रिया पर अनिश्चितता बनी रह सकती है।

आगे क्या होगा?

अब सबकी नजर NCLT अध्यक्ष के अगले कदम पर है। तीसरे सदस्य की नियुक्ति होती है या अध्यक्ष स्वयं आदेश देते हैं, यह तय करेगा कि मामले में बहुमत की राय किस दिशा में जाती है।

इसके बाद संबंधित पक्षों के पास उपलब्ध कानूनी विकल्पों के आधार पर आगे की कार्यवाही हो सकती है।

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