वैश्विक चुनौतियों के बावजूद FY27 में 7% विकास दर कायम रखेगा भारत: निर्मला सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 7% की आर्थिक वृद्धि बनाए रख सकता है। उन्होंने घरेलू मांग, निवेश और मजबूत आर्थिक बुनियाद को भारत की विकास क्षमता का प्रमुख आधार बताया।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भरोसा जताया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी अनिश्चितताओं और बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारत वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 7% की आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखने में सक्षम रहेगा। उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू मांग, निवेश और अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती भारत को वैश्विक दबावों से निपटने में मदद करेगी।
वैश्विक हालात के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत
वित्त मंत्री के मुताबिक, दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं सुस्त विकास, भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक अनिश्चितताओं और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे माहौल में भारत की आर्थिक स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान आर्थिक गतिविधियों को गति देने, निवेश को बढ़ावा देने और घरेलू स्तर पर मांग को मजबूत बनाए रखने पर है। इन प्रयासों से वैश्विक झटकों के बावजूद विकास की रफ्तार बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
घरेलू मांग को माना अहम आधार
सीतारमण ने भारत की बड़ी घरेलू अर्थव्यवस्था को विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया। उनका कहना है कि देश में उपभोक्ता मांग और निवेश की गतिविधियां आर्थिक वृद्धि को सहारा दे रही हैं।
सरकार बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और विभिन्न क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में सरकारी खर्च से आर्थिक गतिविधियों के साथ रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार और टैरिफ से जुड़ी नीतियों में बदलाव भारत के लिए चुनौती पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक मांग में कमजोरी और भू-राजनीतिक तनाव भी भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।
ऐसे में सरकार का जोर अर्थव्यवस्था को अधिक लचीला बनाने और घरेलू विकास के स्रोतों को मजबूत करने पर है। वित्त मंत्री का विश्वास है कि भारत की आर्थिक बुनियाद इन चुनौतियों का सामना करने के लिए पर्याप्त मजबूत है।
FY27 पर सरकार की नजर
वित्त वर्ष 2026-27 भारत की आर्थिक रणनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार के सामने विकास को बनाए रखने के साथ महंगाई, रोजगार और वैश्विक आर्थिक जोखिमों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी।
सीतारमण का 7% विकास दर का अनुमान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आर्थिक माहौल अनिश्चित बना हुआ है। यदि निवेश और घरेलू मांग की रफ्तार बनी रहती है, तो भारत के लिए मजबूत वृद्धि दर्ज करना संभव हो सकता है।
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