राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम: बोले- महिलाएं किसी की संपत्ति नहीं, उनकी अपनी पहचान है

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार, 22 अगस्त को पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं के अधिकार और उनकी स्वतंत्र पहचान को लेकर बड़ा बयान दिया। खास तौर पर छात्राओं के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा, सुरक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई।

Aug 24, 2026 - 22:43
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राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम: बोले- महिलाएं किसी की संपत्ति नहीं, उनकी अपनी पहचान है

‘महिलाएं किसी की नहीं, खुद की हैं’
राहुल गांधी ने मंच से कहा कि महिलाओं की पहचान सिर्फ किसी की बेटी, पत्नी या मां होने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने पिता, पति या बेटे की पहचान से नहीं, बल्कि अपनी खुद की पहचान से जानी जानी चाहिए।

समाज में महिलाओं को किसी पुरुष रिश्तेदार के अधीन रखने वाली सोच को बदलना होगा। इसी संदर्भ में उन्होंने मनुस्मृति का जिक्र करते हुए उसमें महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर कही गई बातों को शर्मनाक बताया।

राहुल ने छात्राओं से कहा कि उन्हें अपने फैसले खुद लेने और अपने सपनों के लिए आगे बढ़ने का पूरा हक है। यह सिर्फ व्यक्तिगत आजादी का मुद्दा नहीं, बल्कि देश की तरक्की से जुड़ा मुद्दा है।

‘70 करोड़ महिलाएं भारत की सबसे बड़ी ताकत’
राहुल गांधी ने देश की करीब 70 करोड़ महिलाओं को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि हर महिला की अपनी अलग कहानी, सोच और सपने हैं और देश के विकास में उनकी प्रतिभा और कल्पनाशक्ति का इस्तेमाल होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए समान अवसर, सुरक्षा और अपनी बात रखने की आजादी मिलनी चाहिए। अगर महिलाओं को बराबरी का मौका मिलता है तो फायदा सिर्फ उन्हें नहीं, पूरे समाज और देश को होता है।

छात्राओं ने भी रखी अपनी बात
यह कार्यक्रम सिर्फ भाषण तक सीमित नहीं था। इसमें छात्राओं को अपनी समस्याएं सीधे रखने का मंच भी दिया गया। छात्राओं ने शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी, रोजगार के अवसरों और सामाजिक भेदभाव को लेकर अपनी चिंताएं साझा कीं। कई छात्राओं ने कैंपस में सुरक्षा और बराबरी के मौके को लेकर भी सवाल उठाए।

पहले से था राजनीतिक विवाद
कार्यक्रम से पहले पुणे पुलिस ने आयोजकों के सामने 30 शर्तें रखी थीं। इसमें आपत्तिजनक पोस्टर-बैनर पर रोक, धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने जैसी शर्तें शामिल थीं। हजारों की भीड़ जुटने की संभावना के चलते पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे।

कार्यक्रम के बाद राहुल गांधी के बयान पर सियासी चर्चा भी तेज हो गई, लेकिन पुणे में उनका मुख्य जोर छात्राओं को अपनी आवाज खुद उठाने और अपनी पहचान खुद तय करने के लिए प्रेरित करने पर रहा।

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