'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर किरेन रिजिजू ने दी सफाई, बताया किसके लिए किया था इस्तेमाल
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में इस्तेमाल किए गए 'दिमागी नक्सल' शब्द पर अपनी सफाई दी है। इंडिया टुडे के पॉडकास्ट 'अनपॉलिटिक्स' में बात करते हुए उन्होंने साफ किया कि उन्होंने यह शब्द किन लोगों के लिए इस्तेमाल किया था।
दरअसल, रिजिजू के इस शब्द के इस्तेमाल के बाद विपक्ष ने काफी हंगामा किया था और उन पर लोगों को टारगेट करने का आरोप लगाया था।
पॉडकास्ट में बताया 'दिमागी नक्सल' का मतलब
रिजिजू ने कहा कि 'दिमागी नक्सल' शब्द किसी एक व्यक्ति या पार्टी के लिए नहीं है। उनके मुताबिक यह उन लोगों के लिए है जिनकी सोच देश के खिलाफ है।
तीन तरह के लोगों को बताया 'दिमागी नक्सल'
रिजिजू ने तीन कैटेगरी गिनाईं:
1. अलगाववाद का समर्थन करने वाले: जो लोग देश में अलगाववाद और टुकड़े-टुकड़े करने वाली सोच का समर्थन करते हैं।
2. संविधान को न मानने वाले: जो लोग भारत के संविधान को नहीं मानते और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की बात करते हैं।
3. विकास में बाधा डालने वाले: जो लोग जानबूझकर भारत की आर्थिक तरक्की और प्रगति में रोड़ा अटकाने की कोशिश करते हैं।
रिजिजू ने कहा कि जो लोग भारत की एकता, अखंडता और संविधान के खिलाफ काम करेंगे, उनकी सोच को ही उन्होंने 'दिमागी नक्सल' कहा है। उनका कहना था कि यह शब्द देशहित के संदर्भ में इस्तेमाल किया गया है।
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