महंगाई का झटका! LPG महंगी, प्याज 23% उछला; 7 महीने के हाई पर कीमतें

जुलाई में महंगाई ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया। LPG, प्याज, टमाटर और आलू की कीमतें बढ़ीं। प्याज के दाम 23% उछलकर 7 महीने के हाई पर पहुंचे, जबकि वेज थाली की लागत भी 2% बढ़ी।

Aug 8, 2026 - 18:00
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महंगाई का झटका! LPG महंगी, प्याज 23% उछला; 7 महीने के हाई पर कीमतें

रसोई का बजट हुआ बेपटरी: जुलाई की महंगाई ने बढ़ाई आम जनता की मुश्किलें

जुलाई के महीने ने आम आदमी की रसोई का पूरा बजट हिलाकर रख दिया है। घर-घर में रोजमर्रा की जरूरत बनने वाली खाने-पीने की चीजें और घरेलू गैस सिलेंडर अचानक काफी महंगे हो गए हैं। सब्जियों के बाजार में मची इस उथल-पुथल के बीच अकेले प्याज के भाव में सीधे 23 प्रतिशत का बड़ा उछाल देखा गया है, जिससे इसकी कीमतें पिछले सात महीनों के सबसे ऊपरी स्तर पर जा पहुंची हैं।

इस भारी-भरकम महंगाई का सीधा असर घर की थाली पर पड़ रहा है। दाल-रोटी के साथ बनने वाली आम शाकाहारी थाली की कुल लागत में 2 प्रतिशत की तेजी आ गई है। जब हरी सब्जियों के साथ गैस सिलेंडर भी महंगा हो जाए, तो आम परिवार के लिए महीने का हिसाब-किताब बिठाना बेहद कठिन हो जाता है।

क्यों आसमान छू रहे हैं प्याज और एलपीजी के दाम?

  • फसल खराब होना: देश में प्याज की पैदावार के मुख्य गढ़ माने जाने वाले महाराष्ट्र में मौसम की मार और बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में फसल खराब होने और कोल्ड स्टोरेज में रखा पुराना स्टॉक खत्म होने की वजह से बाजार में माल की भारी कमी पैदा हो गई।
  • ऊर्जा और माल ढुलाई की बढ़ती लागत: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और ईंधन के दामों में उतार-चढ़ाव के कारण ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी बढ़ गया है, जिसका सीधा असर एलपीजी सिलेंडरों और अन्य जरूरी सामानों की खुदरा कीमतों पर पड़ा है।
  • बजट पर चौतरफा मार: हालांकि आलू और टमाटर के तेवर थोड़े नरम जरूर पड़े हैं, लेकिन प्याज और रसोई गैस की बेकाबू कीमतों ने आम आदमी की जेब में बड़ा छेद कर दिया है।

किचन की बढ़ती लागत से कैसे जूझ रहा है आम परिवार?

बढ़ती महंगाई ने नौकरीपेशा और मध्यमवर्गीय परिवारों को अपने खर्चों में कटौती करने पर मजबूर कर दिया है। गृहणियां अब दाल-सब्जी बनाने में भी सौ बार सोच रही हैं ताकि किसी तरह महीने का अंत बिना कर्ज लिए निकल सके। सरकार और प्रशासन भले ही हालात काबू में होने के दावे करें, लेकिन बाजार की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जब तक नई फसल मंडियों में पूरी तरह नहीं उतरती और सप्लाई चेन पटरी पर नहीं आती, तब तक आम जनता को इस वित्तीय दबाव से राहत मिलने की कोई खास उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

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