भारत के कोर सेक्टर की रफ्तार जुलाई में घटी, ग्रोथ 5.4% पर; तेल और उर्वरक उत्पादन में गिरावट

भारत के आठ प्रमुख कोर सेक्टर की वृद्धि दर जुलाई 2026 में घटकर 5.4% रह गई, जबकि जून में यह 8.5% थी। कच्चे तेल और उर्वरक उत्पादन में गिरावट ने कुल औद्योगिक वृद्धि पर दबाव डाला। वहीं बिजली, स्टील और सीमेंट जैसे क्षेत्रों ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए ग्रोथ को सहारा दिया। कोर सेक्टर का प्रदर्शन भारत की औद्योगिक गतिविधि और आर्थिक रफ्तार का अहम संकेतक माना जाता है।

Aug 20, 2026 - 23:15
 0
भारत के कोर सेक्टर की रफ्तार जुलाई में घटी, ग्रोथ 5.4% पर; तेल और उर्वरक उत्पादन में गिरावट

भारत के आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों यानी कोर सेक्टर की वृद्धि दर जुलाई 2026 में धीमी होकर 5.4% रह गई। जून में इन क्षेत्रों की ग्रोथ 8.5% रही थी। ताजा आंकड़ों से संकेत मिलता है कि कच्चे तेल और उर्वरक उत्पादन में कमजोरी ने जुलाई में कुल औद्योगिक प्रदर्शन पर दबाव डाला।

आठ प्रमुख उद्योगों पर टिकी अर्थव्यवस्था

कोर सेक्टर में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, स्टील, सीमेंट और बिजली शामिल हैं। इन आठ क्षेत्रों का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में करीब 40% भार है। इसलिए इनके प्रदर्शन को देश की औद्योगिक गतिविधियों और आर्थिक रफ्तार का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।

जुलाई में अधिकांश क्षेत्रों ने सकारात्मक प्रदर्शन किया, लेकिन कुछ प्रमुख क्षेत्रों में कमजोरी ने कुल वृद्धि को प्रभावित किया।

कच्चे तेल और उर्वरक उत्पादन में गिरावट

जुलाई के दौरान कच्चे तेल के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा उर्वरक क्षेत्र का प्रदर्शन भी कमजोर रहा। इन दोनों क्षेत्रों में कमी का असर पूरे कोर सेक्टर की वृद्धि दर पर पड़ा।

कच्चे तेल का उत्पादन लंबे समय से घरेलू ऊर्जा क्षेत्र के लिए चुनौती बना हुआ है। उत्पादन में गिरावट से आयात पर निर्भरता और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी दबाव बढ़ सकता है।

वहीं, कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उर्वरक उत्पादन में कमजोरी आने से आने वाले महीनों में आपूर्ति और कीमतों पर भी नजर रहेगी।

बिजली, स्टील और सीमेंट से मिला सहारा

कमजोर क्षेत्रों के बावजूद बिजली, स्टील और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में गतिविधियां बनी रहीं। इन क्षेत्रों का प्रदर्शन निर्माण, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक मांग की स्थिति को दर्शाता है।

विशेषज्ञों के लिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले महीनों में कोर सेक्टर की वृद्धि किस दिशा में जाती है। यदि ऊर्जा और उर्वरक उत्पादन में सुधार होता है, तो औद्योगिक गतिविधियों को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।

आर्थिक रफ्तार के लिए अहम संकेत

कोर सेक्टर की 5.4% वृद्धि यह बताती है कि भारत की औद्योगिक अर्थव्यवस्था अभी विस्तार कर रही है, लेकिन जून की तुलना में गति कमजोर हुई है। आने वाले IIP आंकड़ों में इसका असर दिखाई दे सकता है।

सरकार और बाजार दोनों की नजर अब उत्पादन, बिजली की मांग, बुनियादी ढांचे की गतिविधियों और कच्चे तेल जैसे प्रमुख क्षेत्रों के प्रदर्शन पर रहेगी। जुलाई के आंकड़े आर्थिक विकास की तस्वीर में मिश्रित संकेत देते हैं—जहां औद्योगिक गतिविधि बढ़ी है, वहीं कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कमजोरी चिंता का विषय बनी हुई है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0