‘मैं आर्टिकल 370 का समर्थन करती हूं, मैं दिमागी नक्सल हूं’: महबूबा मुफ्ती का किरेन रिजिजू पर पलटवार

पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने अनुच्छेद 370 के समर्थन को लेकर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू पर पलटवार किया है। रिजिजू की “दिमागी नक्सल” संबंधी टिप्पणी के जवाब में महबूबा ने कहा कि वह अनुच्छेद 370 का समर्थन करती हैं और इसी संदर्भ में खुद को “दिमागी नक्सल” बताया।

Aug 17, 2026 - 20:36
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‘मैं आर्टिकल 370 का समर्थन करती हूं, मैं दिमागी नक्सल हूं’: महबूबा मुफ्ती का किरेन रिजिजू पर पलटवार

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने अनुच्छेद 370 को लेकर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “मैं आर्टिकल 370 का समर्थन करती हूं। मैं दिमागी नक्सल हूं।” उनका यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद शुरू हुए राजनीतिक विवाद के बीच आया है।

रिजिजू के बयान के बाद महबूबा का जवाब

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक पोस्ट में स्पष्ट किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी नेताओं को “दिमागी नक्सल” नहीं कहा था। रिजिजू ने अपने बयान में उन लोगों का उल्लेख किया जिन्हें वह इस शब्द के दायरे में मानते हैं। इनमें माओवाद का समर्थन करने वाले, भारतीय संविधान को न मानने वाले, अलगाववादियों का समर्थन करने वाले और अनुच्छेद 370 के समर्थक शामिल बताए गए।

रिजिजू के इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए महबूबा मुफ्ती ने खुद को “दिमागी नक्सल” कहकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया। उनका बयान सीधे तौर पर अनुच्छेद 370 के समर्थन को लेकर था।

स्वतंत्रता दिवस भाषण के बाद शुरू हुआ विवाद

यह पूरा विवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद शुरू हुआ। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में “दिमागी नक्सल” शब्द का इस्तेमाल करते हुए ऐसी विचारधारा को लेकर चिंता जताई थी, जिसे उन्होंने व्यवस्था के भीतर मौजूद बताते हुए देश के लिए चुनौती बताया।

इसके बाद विपक्षी नेताओं की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। रिजिजू ने सफाई देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी का मतलब विपक्षी नेताओं को इस नाम से संबोधित करना नहीं था। उन्होंने “दिमागी नक्सल” शब्द की अपनी व्याख्या भी साझा की।

अनुच्छेद 370 पर पुराना राजनीतिक मतभेद

महबूबा मुफ्ती लंबे समय से जम्मू-कश्मीर के लिए अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग करती रही हैं। केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के लिए संवैधानिक बदलाव किए थे। इसके बाद पूर्व राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया।

महबूबा और उनकी पार्टी लगातार इस फैसले का विरोध करती रही हैं। हाल के दिनों में भी PDP ने अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज की हैं।

बयान पर सियासी प्रतिक्रियाएं तेज

महबूबा मुफ्ती की टिप्पणी के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस और बीजेपी नेताओं ने उनके बयान पर प्रतिक्रिया दी है। इस पूरे घटनाक्रम ने अनुच्छेद 370, जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति और राजनीतिक असहमति को लेकर चल रही बहस को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

फिलहाल, महबूबा मुफ्ती के बयान ने बीजेपी और विपक्ष के बीच चल रही “दिमागी नक्सल” वाली राजनीतिक बहस को एक नया मोड़ दे दिया है। अनुच्छेद 370 का मुद्दा एक बार फिर जम्मू-कश्मीर की राजनीति के केंद्र में दिखाई दे रहा है।

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