Rolls-Royce और Reliance मिलकर AMCA के लिए बनाएंगे स्वदेशी कॉम्बैट इंजन

Reliance Industries और Rolls-Royce ने AMCA कार्यक्रम के लिए स्वदेशी कॉम्बैट इंजन विकसित करने की रणनीतिक साझेदारी की है। भारत में Aerospace Gas Turbine Complex की संभावना भी तलाश की जाएगी, जिससे देश की एयरोस्पेस तकनीक और रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूती मिल सकती है।

Aug 15, 2026 - 00:14
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Rolls-Royce और Reliance मिलकर AMCA के लिए बनाएंगे स्वदेशी कॉम्बैट इंजन

नई दिल्ली: भारत के स्वदेशी रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए एक अहम घटनाक्रम में Reliance Industries और ब्रिटेन की Rolls-Royce ने भारत के Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) कार्यक्रम के लिए स्वदेशी कॉम्बैट इंजन विकसित करने की रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। दोनों कंपनियां इंजन के डिजाइन, विकास, निर्माण और डिलीवरी से जुड़ी क्षमताओं को भारत में विकसित करने की दिशा में काम करेंगी।

भारत में बनेगा एयरोस्पेस गैस टर्बाइन कॉम्प्लेक्स

साझेदारी के तहत दोनों कंपनियां भारत में एक समर्पित Aerospace Gas Turbine Complex स्थापित करने की संभावना तलाशेंगी। इसे पावर और प्रोपल्शन तकनीक के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तौर पर विकसित करने की योजना है। इससे भारत में अत्याधुनिक एयरो-इंजन तकनीक और विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा मिल सकता है।

AMCA कार्यक्रम के लिए अहम कदम

AMCA भारत के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान कार्यक्रम का हिस्सा है। इसके लिए स्वदेशी इंजन विकसित करना भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय से लड़ाकू विमानों के उन्नत इंजन भारत के लिए एक चुनौती रहे हैं, ऐसे में घरेलू स्तर पर इंजन क्षमता विकसित करना रणनीतिक रूप से अहम है।

AMCA के प्रोटोटाइप की 2028 के आसपास शुरुआत की योजना बताई गई है। यह परियोजना भारतीय वायुसेना के भविष्य के लड़ाकू विमान बेड़े के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Reliance की रक्षा क्षेत्र में बढ़ती भूमिका

Reliance Industries पहले से ही रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। इस साझेदारी से निजी क्षेत्र की भागीदारी को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। Rolls-Royce की एयरो-इंजन विशेषज्ञता और Reliance की औद्योगिक एवं विनिर्माण क्षमताओं का संयोजन भारत में एक व्यापक स्वदेशी एयरोस्पेस इकोसिस्टम विकसित करने में मदद कर सकता है।

इस साझेदारी का सबसे बड़ा महत्व भारत की आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की कोशिशों से जुड़ा है। स्वदेशी इंजन क्षमता विकसित होने से भविष्य में महत्वपूर्ण प्रणोदन तकनीक के लिए विदेशी निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, इससे भारत में उन्नत इंजीनियरिंग, विनिर्माण और एयरोस्पेस तकनीक से जुड़े कौशल और औद्योगिक क्षमताओं को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

हालांकि, कंपनियों ने अभी साझेदारी के निवेश आकार और अंतिम व्यावसायिक ढांचे का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया है।

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