734 करोड़ के GST मामले में जमशेदपुर के कारोबारी और बेटे गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा न्यायिक हिरासत में
रांची/जमशेदपुर- कथित 734 करोड़ रुपये के फर्जी GST इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जमशेदपुर के स्क्रैप कारोबारी ज्ञानचंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल और उनके बेटे राज जायसवाल को गिरफ्तार किया है। बुधवार देर रात हुई गिरफ्तारी के बाद दोनों को गुरुवार को रांची स्थित ED की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार भेज दिया गया।ED ने फिलहाल दोनों को रिमांड पर लेने के लिए अदालत में आवेदन नहीं दिया है। जांच एजेंसी आगे की पूछताछ के लिए रिमांड की मांग कर सकती है।
चार ठिकानों पर हुई थी ED की कार्रवाई
इस मामले की जांच के तहत ED ने बुधवार को झारखंड और पश्चिम बंगाल में कई परिसरों की तलाशी ली थी। कार्रवाई जमशेदपुर से जुड़े कारोबारी परिसरों और कोलकाता स्थित ठिकाने तक पहुंची। जांच के दौरान कारोबारी ज्ञानचंद जायसवाल और उनके अकाउंटेंट संजय पारेख से जुड़े परिसरों की भी तलाशी ली गई।तलाशी के दौरान GST से जुड़े रिकॉर्ड, कारोबारी लेन-देन के दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण कागजात की जांच की गई। ED की कार्रवाई का फोकस कथित फर्जी इनवॉइस और ITC के इस्तेमाल से जुड़े वित्तीय लेन-देन पर है।
बिना माल की सप्लाई के ITC लेने का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, ज्ञानचंद जायसवाल पर ऐसी कंपनियों के इनवॉइस के आधार पर ITC का लाभ लेने का आरोप है, जिनके जरिए वास्तविक माल की आपूर्ति नहीं हुई। ED को जांच के दौरान कथित फर्जी कंपनियों और उनके जरिए हुए लेन-देन से संबंधित जानकारी मिली है।एजेंसी अब जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच करेगी। संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जा रही है। यदि जांच में किसी संपत्ति का संबंध कथित अपराध से अर्जित रकम से स्थापित होता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
135 फर्जी कंपनियों और 5,000 करोड़ के बिलिंग नेटवर्क की जांच
इस मामले में ED की पूर्व जांच के दौरान 135 कथित फर्जी कंपनियों के जरिए करीब 5,000 करोड़ रुपये के फर्जी बिल जारी किए जाने और उससे लगभग 734 करोड़ रुपये के GST फर्जीवाड़े का आरोप सामने आया था। इसी मामले में ED ने पहले जमशेदपुर के कारोबारी विक्की भालोटिया और कोलकाता के शिव कुमार देवड़ा, मोहित देवड़ा तथा अमित गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई की थी। जुलाई 2025 में इन आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।जांच के दौरान एजेंसी ने कथित फर्जी कंपनियों से जुड़े बैंक खातों में उपलब्ध रकम को फ्रीज करने और अपराध से अर्जित मानी गई संपत्तियों पर कार्रवाई की थी।
2024 में भी DGGI ने की थी कार्रवाई
ज्ञानचंद जायसवाल का नाम इस मामले में पहली बार 2024 में सामने आया था। उस समय GST खुफिया महानिदेशालय (DGGI) की जमशेदपुर टीम ने उनसे जुड़े कथित फर्जी ITC मामले की जांच की थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में करीब 55 करोड़ रुपये से अधिक के ITC से जुड़े कथित फर्जी बिलिंग का मामला सामने आया था।जांच में जिन कंपनियों के नाम सामने आए, उनके जरिए कागजों पर कारोबार दिखाकर बिना वास्तविक माल की आपूर्ति के बिल जारी करने का आरोप लगाया गया था। उस मामले में ज्ञानचंद जायसवाल को गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।
पुराने मामले से जुड़ी जांच आगे बढ़ी
अब ED ने इसी तरह के कथित फर्जी ITC और वित्तीय लेन-देन से जुड़े मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच आगे बढ़ाई है। बुधवार की तलाशी के बाद ज्ञानचंद जायसवाल और उनके बेटे राज जायसवाल की गिरफ्तारी इसी जांच का हिस्सा बताई गई है।ED अब तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड, संपत्ति और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और अदालत के आदेश के आधार पर होगी।
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