हेमंत सोरेन की याचिका पर HC का बड़ा कदम, ED से मांगा जवाब, 28 अक्टूबर को सुनवाई
रांची: बड़गाईं जमीन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिका में रांची की विशेष PMLA अदालत में उनके खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई है। हाई कोर्ट ने मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जवाब मांगा है।यह मामला बड़गाईं अंचल की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और उससे संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग जांच का है। मामले में हेमंत सोरेन ने निचली अदालत की कार्यवाही को हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
आरोप गठन पर रोक की मांग
हेमंत सोरेन की ओर से दायर याचिका में पीएमएलए की धारा 44(1)(डी) का हवाला देते हुए दलील दी गई है कि जब तक मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनके खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।याचिका में यह भी मांग की गई है कि विशेष PMLA अदालत की ओर से आरोप गठन को लेकर की जा रही कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। ED ने इस दलील का विरोध किया है।
ED को जवाब दाखिल करने का निर्देश
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान ED की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने पक्ष रखा। इससे पहले अदालत ने ED को याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया था। 9 सितंबर के आदेश में हाई कोर्ट ने ED को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था और मामले को 14 अक्टूबर को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था।
PMLA कोर्ट में आरोप गठन की प्रक्रिया
इसी मामले में रांची की विशेष PMLA अदालत में आरोप गठन को लेकर भी सुनवाई चल रही है। 24 सितंबर को अदालत ने दस्तावेजों के अध्ययन के लिए हेमंत सोरेन को छह दिन का समय दिया था और आरोप गठन की सुनवाई 30 सितंबर तक टाल दी थी।इससे पहले हेमंत सोरेन की ओर से आरोप गठन और आगे की कार्यवाही टालने की मांग वाली याचिका निचली अदालत में दाखिल की गई थी। निचली अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मामले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई।
मामला 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा
ED की जांच के अनुसार, बड़गाईं अंचल की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला सामने आया। इस मामले में ED ने कई आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की है। हेमंत सोरेन मामले में आरोपों से इनकार करते रहे हैं और उनकी ओर से अदालत में कानूनी दलीलें रखी गई हैं।अब हाई कोर्ट में ED के जवाब और आगे की सुनवाई पर नजर रहेगी। मामले की न्यायिक प्रक्रिया जारी है और आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की कार्यवाही के बाद ही होगा।
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