Sadhguru का बड़ा सुझाव: हिमालयी आपदाओं से निपटने के लिए 5 देशों का 'Himalayan Board' बने
सद्गुरु ने हिमालयी क्षेत्र में बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी आपदाओं से निपटने के लिए पांच देशों का 'हिमालयन बोर्ड' बनाने की मांग की है। उन्होंने हिमालय को साझा प्राकृतिक विरासत मानकर सामूहिक जिम्मेदारी की अपील की।
सद्गुरु ने हिमालयी आपदाओं से निपटने के लिए 5 देशों का 'हिमालयन बोर्ड' बनाने की मांग की
नई दिल्ली: आध्यात्मिक गुरु और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए पांच देशों को शामिल करते हुए एक 'हिमालयन बोर्ड' बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि हिमालय को केवल अलग-अलग देशों की सीमाओं के भीतर देखने के बजाय पूरे क्षेत्र को एक साझा प्राकृतिक व्यवस्था के रूप में समझने की जरूरत है।
हिमालय सीमाओं से बड़ा प्राकृतिक क्षेत्र
सद्गुरु ने कहा कि हिमालय राजनीतिक सीमाओं से कहीं आगे तक फैला हुआ है और इसका प्रभाव उन सभी लोगों पर पड़ता है, जो इस पर्वतीय क्षेत्र और उससे निकलने वाली नदियों पर निर्भर हैं। उनके मुताबिक, हिमालय के भविष्य को लेकर भारत, नेपाल, भूटान, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों को सामूहिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में बाढ़, भूस्खलन, ग्लेशियरों में बदलाव और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे के बीच क्षेत्रीय सहयोग और साझा आपदा प्रबंधन व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया।
साझा निगरानी और आपदा प्रबंधन की जरूरत
प्रस्तावित बोर्ड के जरिए हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरणीय बदलावों की निगरानी, मौसम और ग्लेशियर संबंधी डेटा साझा करने तथा आपदा की स्थिति में तेजी से राहत एवं बचाव अभियान चलाने जैसी व्यवस्थाओं पर सहयोग किया जा सकता है।
सद्गुरु का कहना है कि किसी एक देश की सीमाओं के भीतर समस्या को सीमित मानना पर्याप्त नहीं होगा, क्योंकि हिमालयी पारिस्थितिकी और उससे जुड़ी नदियां कई देशों को प्रभावित करती हैं।
नेपाल-चीन आपदा के बीच आया बयान
सद्गुरु का यह आह्वान ऐसे समय आया है जब हिमालयी क्षेत्र में हाल की बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इन घटनाओं ने एक बार फिर सीमा पार आपदा प्रबंधन और हिमालयी पारिस्थितिकी की सुरक्षा के लिए देशों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत को सामने रखा है।
उन्होंने हिमालय को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने के लिए दीर्घकालिक और सामूहिक प्रयास करने की अपील की।
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