आरक्षण के मुद्दे पर NDA में घमासान: चिराग पासवान और जीतन राम मांझी आमने-सामने

SC आरक्षण में कोटे के भीतर कोटा और क्रीमी लेयर के मुद्दे पर NDA के सहयोगी चिराग पासवान और जीतन राम मांझी आमने-सामने आ गए हैं। मांझी खेमे का तर्क है कि आरक्षण का लाभ सबसे वंचित दलित समुदायों तक पहुंचाने के लिए सब-कैटेगरी जरूरी है, जबकि चिराग पासवान क्रीमी लेयर के विचार का विरोध कर रहे हैं। विवाद अब इस्तीफे की मांग तक पहुंच गया है, जिससे बिहार NDA में मतभेद खुलकर सामने आए हैं।

Aug 30, 2026 - 01:13
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आरक्षण के मुद्दे पर NDA में घमासान: चिराग पासवान और जीतन राम मांझी आमने-सामने

बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर SC आरक्षण के कोटे में कोटा और क्रीमी लेयर को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के नेता जीतन राम मांझी के खेमे के बीच इस मुद्दे पर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। दोनों पक्ष आरक्षण की व्यवस्था और इसके लाभ को लेकर अलग-अलग राय रखते हैं।

मांझी खेमे ने उठाई सब-कैटेगरी की मांग

जीतन राम मांझी और उनके बेटे एवं बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन लंबे समय से अनुसूचित जातियों के भीतर अधिक वंचित समूहों तक आरक्षण का लाभ पहुंचाने की बात कर रहे हैं। उनका तर्क है कि SC समुदाय के सभी वर्गों को आरक्षण का समान लाभ नहीं मिल रहा है।

मांझी खेमे का समर्थन SC आरक्षण के भीतर सब-कैटेगरी यानी ‘कोटे में कोटा’ की व्यवस्था के पक्ष में है। इसके तहत आरक्षण के मौजूदा हिस्से के भीतर अलग-अलग समुदायों को उनके सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के आधार पर प्रतिनिधित्व देने की बात कही जाती है।

चिराग पासवान ने किया विरोध

वहीं, चिराग पासवान ने SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर के विचार का विरोध किया है। उनका कहना है कि अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण केवल आर्थिक कमजोरी के आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक भेदभाव और ऐतिहासिक वंचना को ध्यान में रखते हुए दिया गया है।

चिराग का तर्क है कि आर्थिक रूप से बेहतर स्थिति हासिल कर चुके परिवारों को भी सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए SC/ST आरक्षण को केवल आर्थिक आधार से जोड़ना उचित नहीं होगा।

इस्तीफे की मांग तक पहुंचा विवाद

आरक्षण के मुद्दे पर दोनों सहयोगी दलों के बीच बयानबाजी इतनी बढ़ गई कि इस्तीफे की मांग तक पहुंच गई। चिराग पासवान ने मांझी और संतोष सुमन के रुख पर सवाल उठाते हुए उनसे अपने मंत्री पदों से इस्तीफा देने की बात कही। इसके जवाब में मांझी खेमे ने भी चिराग के बयान पर पलटवार किया।

विवाद के बीच 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख हो रहा है। शीर्ष अदालत ने राज्यों को SC के भीतर अलग-अलग समूहों की स्थिति के आधार पर सब-कैटेगरी बनाने की अनुमति दी थी। हालांकि, क्रीमी लेयर का मुद्दा अलग और व्यापक राजनीतिक बहस का विषय है।

NDA के लिए चुनौती

चिराग पासवान और जीतन राम मांझी दोनों NDA का हिस्सा हैं। ऐसे में आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर खुला मतभेद गठबंधन के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकता है। बिहार में दलित और वंचित समुदायों का समर्थन चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण है। इसलिए आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर NDA के भीतर और अधिक चर्चा और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

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