ट्रंप ने माना- ईरानी खतरे के चलते बदला था विमान, कैटरिंग ट्रक से पहुंचे दूसरे प्लेन तक
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने माना है कि ईरान से जुड़े संभावित हमले के खतरे के कारण उन्हें तुर्किये से ब्रिटेन जाते समय अपना विमान बदलना पपड़ाथा। सुरक्षा एजेंसियों की सलाह पर ट्रंप को एयर फोर्स वन से गुपचुप तरीके से निकालकर दूसरे सैन्य विमान में ले जाया गया। इस पूरी कार्रवाई को बेहद गोपनीय रखा गया था।
हमले का खतरा था, इसलिए बदला गया विमान
डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि तुर्किये में नाटो सम्मेलन खत्म होने के बाद जब वह ब्रिटेन के लिए रवाना हो रहे थे, तब अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को ईरान से जुड़ी एक धमकी की जानकारी मिली थी।
इसके बाद सीक्रेट सर्विस ने फौरन ट्रंप को विमान बदलने की सलाह दी। अधिकारियों को आशंका थी कि अगर हमला होता है तो एयर फोर्स वन को निशाना बनाया जा सकता है। इसी वजह से राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया गया।
कैटरिंग ट्रक में छिपाकर दूसरे विमान तक ले जाया गया
सुरक्षा योजना के तहत ट्रंप को एयर फोर्स वन से सीधे बाहर नहीं निकाला गया। उन्हें एक कैटरिंग ट्रक के जरिए एयरपोर्ट के दूसरे हिस्से में ले जाया गया।
वहां पहले से एक छोटे सैन्य विमान को तैयार रखा गया था। ट्रंप इसी विमान में सवार हुए और गुपचुप तरीके से ब्रिटेन के लिए उड़ान भर गए।
एयर फोर्स वन को बनाया गया था डिकॉय
इस ऑपरेशन का सबसे अहम हिस्सा यह था कि एयर फोर्स वन को डिकॉय की तरह इस्तेमाल किया गया। कई अधिकारी, सहयोगी और पत्रकार उसी विमान में सवार रहे। उन्हें इस बात की जानकारी तक नहीं थी कि ट्रंप विमान बदल चुके हैं।
दोनों विमानों के ब्रिटेन पहुंचने का समय भी लगभग एक जैसा रखा गया, ताकि राष्ट्रपति की असली लोकेशन का पता न चल सके।
ट्रंप बोले- दूसरा विमान भी खतरे से बाहर नहीं था
ट्रंप ने कहा कि जिस दूसरे विमान में उन्हें ले जाया गया, वह भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं था।
"अगर खतरा किसी खास विमान को निशाना बनाने का था, तो दूसरा विमान भी जोखिम में हो सकता था। लेकिन हम सुरक्षा अधिकारियों की सलाह पर भरोसा करते हैं। मुझे लगातार कई तरह की धमकियां मिलती रहती हैं," ट्रंप ने कहा।
इस खुलासे के बाद अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खासकर इस बात पर चर्चा है कि एयर फोर्स वन में मौजूद पत्रकारों और अधिकारियों को ट्रंप के विमान बदलने की जानकारी क्यों नहीं दी गई। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस तरह के ऑपरेशन में राष्ट्रपति की लोकेशन को गुप्त रखना सामान्य प्रक्रिया है।
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