कालाष्टमी 2026: भगवान काल भैरव की कृपा पाने का पावन अवसर, जानें पूजा का महत्व, शुभ मुहूर्त और शक्तिशाली मंत्र
नई दिल्ली: भगवान शिव के रौद्र स्वरूप भगवान काल भैरव को समर्पित कालाष्टमी का पर्व इस वर्ष 8 जुलाई 2026, बुधवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है।
नई दिल्ली: भगवान शिव के रौद्र स्वरूप भगवान काल भैरव को समर्पित कालाष्टमी का पर्व इस वर्ष 8 जुलाई 2026, बुधवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है।
मान्यता है कि कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन के संकट दूर होते हैं, भय समाप्त होता है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस अवसर पर देशभर के काल भैरव और शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और आरती का आयोजन किया जाएगा।
कालाष्टमी का धार्मिक महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार, कालाष्टमी प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान काल भैरव को समय का स्वामी और धर्म का रक्षक माना जाता है।
भक्तों का विश्वास है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है, ग्रह दोषों का प्रभाव कम होता है और जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
क्या है कालाष्टमी का महत्व
कालाष्टमी के दिन कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं और सुबह स्नान के बाद भगवान काल भैरव की पूजा करते हैं। पूजा में फूल, धूप, दीप, सरसों के तेल का दीपक, नारियल, काले तिल, मिठाई और फल अर्पित किए जाते हैं।
धार्मिक परंपरा के अनुसार इस दिन काले कुत्ते को भोजन कराना भी अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि उसे भगवान काल भैरव का वाहन माना जाता है।
पूजा-विधि और विशेष परंपराएं
भक्त शाम और मध्यरात्रि के समय विशेष पूजा करते हैं, क्योंकि यह समय भगवान काल भैरव की आराधना के लिए शुभ माना जाता है।
कई लोग इस दिन काल भैरव मंदिर या शिवालय जाकर आरती में शामिल होते हैं और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पूजा के दौरान भैरव स्तोत्र और मंत्रों का जाप करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
शक्तिशाली मंत्र का करें जाप
धार्मिक मान्यता है कि कालाष्टमी के दिन "ॐ कालभैरवाय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करने से भगवान काल भैरव प्रसन्न होते हैं।
यह मंत्र भय, बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करने के साथ-साथ मानसिक शांति और आत्मबल प्रदान करने वाला माना जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार इस मंत्र का जाप कर सकते हैं।
भक्ति और आस्था का पर्व
कालाष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, अनुशासन और ईश्वर के प्रति समर्पण का भी संदेश देती है।
भक्तों का मानना है कि इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और भगवान काल भैरव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही कारण है कि हर माह आने वाली कालाष्टमी का श्रद्धालु बेसब्री से इंतजार करते हैं।
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