बैंक मैनेजर का आखिरी कॉल- 'मैंने जहर खा लिया'; 25 दिन पहले बना था पिता, परिजनों ने काम के दबाव को बताया वजह
बैंक मैनेजर की मौत के मामले में परिजनों ने बैंक में बढ़ते काम के दबाव और मानसिक तनाव को वजह बताया है। घटना से परिवार में मातम पसरा हुआ है।
घर का चिराग बुझ गया: काम के दबाव ने ली 25 दिन पहले पिता बने बैंक मैनेजर की जान
एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां पल भर में मातम में बदल गईं। एक बैंक मैनेजर की संदिग्ध हालात में हुई मौत ने न सिर्फ उनके परिवार को, बल्कि पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। अपनों को खो चुके परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और वे इसके पीछे बैंक के अत्यधिक काम और मानसिक तनाव को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
मौत को गले लगाने से पहले उन्होंने अपने परिवार को एक आखिरी फोन किया था। उस कांपती आवाज ने जो कहा, उसने परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी "मैंने जहर खा लिया है। " बदहवास परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल ले भागे, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
गोद सूनी कर गया नवजात का पिता
यह त्रासदी इसलिए और ज्यादा दिल दहला देने वाली है क्योंकि महज 25 दिन पहले ही उनके घर में बच्चे की किलकारी गूंजी थी। जिस घर में अभी नए मेहमान के आने का जश्न मनाया जा रहा था, वहां अचानक चीख-पुकार मच गई। परिजनों ने बताया कि वह पिछले कुछ समय से बहुत ज्यादा परेशान रहने लगे थे। जब भी घर आते, अक्सर बैंक के भारी वर्कलोड और अधिकारियों के दबाव का जिक्र करते थे।
तनाव इस कदर हावी हो चुका था कि उन्होंने ऐसा खौफनाक कदम उठा लिया। अब बेबस परिवार सिर्फ एक ही मांग कर रहा है मामले की निष्पक्ष जांच हो, ताकि सच सामने आ सके कि आखिर किन हालातों ने उन्हें इस हद तक मजबूर कर दिया।
जांच में जुटी पुलिस, व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और कॉल रिकॉर्ड्स की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस हर उस पहलू को खंगाल रही है जिसकी वजह से यह हादसा हुआ।
यह दुखद घटना एक बार फिर कॉरपोरेट और बैंकिंग सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ी करती है। आखिर कब तक 'टारगेट' और 'काम के दबाव' की वेदी पर ऐसे बेकसूरों की जान जाती रहेगी?
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