योगेंद्र साव फिर कांग्रेस के निशाने पर, अनुशासन समिति करेगी फैसला
रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर लगातार सार्वजनिक बयान देने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव एक बार फिर पार्टी की अनुशासनात्मक कार्रवाई के घेरे में हैं। कांग्रेस की प्रदेश अनुशासन समिति ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब उनके जवाब और पूरे प्रकरण पर समिति आगे का फैसला कर सकती है।
योगेंद्र साव के खिलाफ यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब इससे पहले भी उन्हें पार्टी अनुशासन के उल्लंघन के आरोप में कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। मार्च 2026 में कांग्रेस ने उन्हें 3 साल के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया था। हालांकि, जून में यह फैसला वापस ले लिया गया था।
मुख्यमंत्री पर बयान फिर बना विवाद की वजह
ताजा विवाद की जड़ योगेंद्र साव की मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर की गई सार्वजनिक टिप्पणियां हैं। कांग्रेस की अनुशासन समिति ने इन बयानों को पार्टी अनुशासन और नेतृत्व के निर्देशों के अनुरूप नहीं माना है। समिति की ओर से उन्हें लिखित जवाब देने के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा गया था।
JMM नेताओं ने भी जताई आपत्ति
योगेंद्र साव के बयानों को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं की ओर से भी आपत्ति सामने आई है। खासकर हजारीबाग में स्थानीय JMM नेताओं ने कांग्रेस से उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। गठबंधन के भीतर इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक असहजता की चर्चा भी तेज हुई है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से कार्रवाई को सीधे JMM के दबाव का परिणाम बताए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
योगेंद्र साव के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का यह पहला मामला नहीं है। मार्च में कांग्रेस ने उन्हें 3 साल के लिए निष्कासित किया था। बाद में जून में पार्टी नेतृत्व ने उनका निष्कासन रद्द कर दिया। उस समय भी इस फैसले को लेकर कांग्रेस के भीतर चर्चा हुई थी।अब दोबारा नोटिस जारी होने के बाद सवाल यह है कि कांग्रेस इस बार क्या फैसला लेती है। पार्टी की अनुशासन समिति उनके जवाब, बयानों और पूरे घटनाक्रम की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगी।
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