2 हफ्ते की तेजी पर ब्रेक! मिडिल ईस्ट तनाव और तेल की कीमतों ने Sensex-Nifty को दिया झटका

मिडिल ईस्ट तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई की चिंता के बीच Sensex और Nifty 50 ने शुक्रवार को गिरावट के साथ कारोबार समाप्त किया। दोनों सूचकांकों की दो सप्ताह से जारी तेजी भी थम गई।

Aug 14, 2026 - 17:42
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2 हफ्ते की तेजी पर ब्रेक! मिडिल ईस्ट तनाव और तेल की कीमतों ने Sensex-Nifty को दिया झटका

भारतीय शेयर बाजार में लगातार दो सप्ताह से जारी तेजी पर शुक्रवार को ब्रेक लग गया। मिडिल ईस्ट में बढ़ती अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई को लेकर बढ़ती चिंताओं ने निवेशकों के सेंटीमेंट पर दबाव डाला। शुक्रवार, 14 अगस्त को Sensex 71 अंक यानी 0.09% गिरकर 78,009.25 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 करीब 30 अंक यानी 0.12% की गिरावट के साथ 24,366 पर रहा।

साप्ताहिक आधार पर भी बाजार कमजोर

पूरे सप्ताह की बात करें तो Sensex में करीब 490 अंकों यानी 0.62% की गिरावट दर्ज हुई। वहीं Nifty 50 करीब 205 अंक यानी 0.83% नीचे रहा। इस तरह दोनों प्रमुख सूचकांकों की दो सप्ताह से चली आ रही लगातार बढ़त समाप्त हो गई।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। Nifty Midcap 100 में सप्ताह के दौरान 0.50% की बढ़त रही, जबकि शुक्रवार को इसमें 0.53% की गिरावट आई। Nifty Smallcap 100 भी शुक्रवार को 0.69% नीचे रहा।

मिडिल ईस्ट संकट से बढ़ी चिंता

बाजार में सबसे बड़ी चिंता मिडिल ईस्ट की स्थिति को लेकर बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता और क्षेत्रीय तनाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है।

Reuters के मुताबिक, Brent crude करीब 4.6% बढ़कर लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि देश अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।

महंगे तेल से महंगाई का डर

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी से भारत में महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की चिंता पैदा हो रही है। इससे निवेशकों को कंपनियों के मुनाफे पर संभावित दबाव की आशंका है।

इसके अलावा बढ़ती बॉन्ड यील्ड ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। ऐसे माहौल में निवेशकों ने जोखिम लेने के बजाय सतर्क रुख अपनाया।

आगे बाजार की नजर किन संकेतों पर?

अब निवेशकों की नजर मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, महंगाई के आंकड़ों और वैश्विक बाजारों के संकेतों पर रहेगी। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, तेल की कीमतों में स्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव में कमी से भारतीय बाजार को राहत मिल सकती है।

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